Weather Update: इस साल मानसून का मिजाज कुछ अलग नजर आया है। देश में कुल बारिश के आंकड़े सामान्य से कम हैं, लेकिन कई इलाकों में कम समय में हुई बेहद तेज बारिश ने हालात गंभीर कर दिए। इसलिए इस मानसून को केवल इस आधार पर नहीं समझा जा सकता कि पूरे देश में कितनी बारिश हुई। असली सवाल यह है कि बारिश कहां, कब और कितनी तीव्रता से हुई।
अगस्त में देशभर में बारिश सामान्य से करीब 16 फीसदी कम रही। इसके साथ ही जून से 31 अगस्त तक पूरे मानसून सीजन में बारिश की कमी बढ़कर लगभग 14 फीसदी हो गई। हालांकि, कम बारिश के इस राष्ट्रीय औसत के बीच कई राज्यों में कुछ ही घंटों के भीतर इतनी मूसलाधार बारिश हुई कि बाढ़, जलभराव और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया।
मौसम विज्ञान विभाग की 31 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। वहीं बिहार, झारखंड, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर 12 से 20 सेंटीमीटर तक बहुत भारी बारिश हुई। मौसम विभाग ने एक सितंबर को भी ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके विपरीत दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने का अनुमान है।
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कम बारिश के बावजूद बाढ़ का खतरा क्यों?
देश का औसत बारिश का आंकड़ा जमीनी हालात की पूरी तस्वीर नहीं बताता। किसी क्षेत्र में पूरे महीने बारिश सामान्य से कम हो सकती है, लेकिन यदि दो-तीन दिनों में अत्यधिक बारिश हो जाए तो खेतों में पानी भर सकता है, शहरों में नाले उफन सकते हैं और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसी बारिश अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ा देती है।
18 अगस्त को उत्तराखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 21 सेंटीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। इसी दिन छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश में भी 12 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश हुई। 25 अगस्त को झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में करीब 20 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज की गई। महीने के अंतिम सप्ताह में मध्य प्रदेश में मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब छह मीटर ऊपर पहुंच गया।
पिछले 10 वर्षों में अगस्त का बदलता मिजाज
आईएमडी के 1971–2020 के औसत के अनुसार, अगस्त में देश में 254.9 मिलीमीटर बारिश सामान्य मानी जाती है। इसी आधार पर हर साल की वास्तविक बारिश की तुलना की जाती है।
2016 में अगस्त में 238.4 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 6.8% कम थी। 2017 में 228 मिमी और 2018 में 241.4 मिमी बारिश हुई। इसके बाद 2019 में बारिश सामान्य से 15% अधिक रही, जबकि 2020 में यह 27% अधिक थी। 2021 में बारिश 24% कम रही। 2022 में यह सामान्य से 3% अधिक रही, जबकि 2023 में 36% की बड़ी कमी दर्ज हुई। 2024 में अगस्त की बारिश सामान्य से 15% अधिक और 2025 में 5% अधिक रही।
इन आंकड़ों से साफ है कि अगस्त की बारिश में पिछले एक दशक के दौरान काफी उतार-चढ़ाव रहा है। इस साल भी तस्वीर कुछ ऐसी ही है—देश के औसत में बारिश कम, लेकिन कई इलाकों में कम समय में बेहद तेज बारिश। यही बदलता पैटर्न मानसून की चुनौती को और जटिल बना रहा है।










