Weather Update: हरियाणा में फरवरी के अंतिम दिनों में मौसम ने अचानक करवट ली है। सर्द हवाओं की रफ्तार कम होने लगी है और शुष्क मौसम का दौर शुरू हो गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अब मैदान और पहाड़ी क्षेत्रों दोनों में किसी भी मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना नहीं है। इस कारण आगामी दिनों में बारिश के आसार बहुत कम रह गए हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि फरवरी के शेष दिनों में मौसम मुख्यतः शुष्क बना रहेगा। हल्के बादल या स्थानीय स्तर पर मामूली गतिविधि हो सकती है, लेकिन किसी प्रभावी मौसम प्रणाली के अभाव में व्यापक वर्षा की उम्मीद नहीं है। शुष्क मौसम का सीधा असर तापमान पर पड़ेगा और दिन के समय गर्मी का अहसास बढ़ने लगेगा। पहाड़ी क्षेत्रों में फिलहाल बर्फबारी या अच्छी बारिश की संभावना नहीं है।
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सर्दियों की बारिश सामान्य से कम

फरवरी महीने में अब तक हुई वर्षा सामान्य से कम रही है। सर्दियों में होने वाली बारिश रबी फसलों के लिए बेहद अहम मानी जाती है। इस बार अपेक्षित मात्रा में वर्षा न होने के कारण गेहूं, सरसों और अन्य फसलों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फरवरी के अंत तक भी बारिश नहीं होती, तो किसानों को सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। इससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और उपज प्रभावित हो सकती है।
तापमान में बढ़ोतरी का अनुमान
शुक्रवार को हरियाणा में अधिकतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री सेल्सियस रहा। सुबह की नमी 44 प्रतिशत रही और शाम को भी यह यथावत बनी रही। हवा की रफ्तार 2.2 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई।
मौसम विभाग ने बताया कि शुष्क मौसम के कारण दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ेगा। दिन के समय धूप तेज रहेगी और अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, सुबह और देर रात हल्की ठंड बनी रह सकती है, लेकिन सर्दियों की तीव्रता धीरे-धीरे कम होती जाएगी।
मौसम में बड़े बदलाव के संकेत नहीं
बारिश की कमी का असर केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भूजल स्तर और जल भंडारण पर भी असर पड़ सकता है। यदि मार्च की शुरुआत में भी मौसम शुष्क रहता है, तो गर्मियों के दौरान पानी की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं। फरवरी के बचे दिनों में शुष्कता और बढ़ेगी, जिससे मौसमी बारिश की कमी का आंकड़ा और नीचे जा सकता है। अब सबकी नजर मार्च के पहले सप्ताह पर टिकी है कि क्या कोई नया मौसम प्रणाली राहत लेकर आती है या गर्मी की दस्तक और तेज होती है।
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