WB Rajya Sabha Election: BJP के नए दांव से बदला सियासी समीकरण, TMC की बढ़ी चुनौती

पश्चिम बंगाल राज्यसभा चुनाव से पहले BJP की नई रणनीति ने राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। पार्टी ने पूर्व TMC नेताओं को अपने साथ जोड़कर राज्यसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया, जिससे तृणमूल कांग्रेस के सामने चुनौती बढ़ गई है। इस कदम को बंगाल की राजनीति में BJP के विस्तार की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

WB Rajya Sabha Election

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 10, 2026

WB Rajya Sabha Election:  पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की तीन रिक्त सीटों पर होने वाले उपचुनाव ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। भारत निर्वाचन आयोग ने इन सीटों के लिए 24 जुलाई की तारीख मतदान के लिए तय की है, जबकि नामांकन की आखिरी तारीख 14 जुलाई है। ये रिक्तियां सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफों के बाद उत्पन्न हुई हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये उपचुनाव सामान्य चुनाव की तरह नहीं, बल्कि हर सीट के लिए अलग-अलग होंगे। यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के अनुरूप है। इस विशेष चुनावी प्रक्रिया के कारण विधानसभा का वर्तमान अंकगणित बेहद महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि प्रत्येक सीट पर जीत हासिल करने के लिए विधायकों के वोटों की गणना पृथक रूप से की जाएगी।

भाजपा के लिए अनुकूल बन रहा विधानसभा का गणित

मौजूदा विधानसभा समीकरणों पर नजर डालें तो पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) काफी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा के पास 208 विधायकों का समर्थन है। उपचुनाव की प्रक्रिया में हर सीट के लिए अलग मतदान होने के कारण, भाजपा अपने विधायकों के वोटों को तीनों उम्मीदवारों के बीच रणनीतिक रूप से विभाजित कर सकती है। इस गणना के आधार पर, भाजपा के प्रत्येक उम्मीदवार को लगभग 69 से 70 वोट मिलने की संभावना है, जो प्रत्येक सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त है। यदि भाजपा अपने पूरे संख्या बल को एकजुट रखने में सफल रहती है, तो तीनों सीटों पर कमल खिलना लगभग तय माना जा रहा है।

टीएमसी के समक्ष संगठनात्मक चुनौती और आंतरिक कलह

दूसरी ओर, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए यह चुनाव एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है। पार्टी न केवल अपने तीन वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे के झटके से जूझ रही है, बल्कि अंदरूनी बागी गुट भी नेतृत्व के लिए सिरदर्द बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, बागी गुट के पास करीब 65 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर जारी सवाल और विधायकों की बदलती निष्ठा टीएमसी की जीत की राह में बड़ा रोड़ा बन सकती है। राज्यसभा में टीएमसी सदस्यों की वर्तमान संख्या घटकर 9 रह गई है, ऐसे में इन तीन सीटों को खोना पार्टी की राष्ट्रीय उपस्थिति और प्रभाव को और कमजोर कर सकता है।

रिक्त सीटों का भविष्य और राजनीतिक निहितार्थ

इन तीन सीटों का कार्यकाल भी अलग-अलग है; जहाँ सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक का कार्यकाल 18 अगस्त 2029 तक था, वहीं सुष्मिता देव का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित था। इस चुनाव का परिणाम केवल राज्यसभा में संख्याबल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक दिशा का एक महत्वपूर्ण संकेत भी होगा। यदि भाजपा तीनों सीटों पर कब्जा जमाती है, तो यह राज्य में टीएमसी की पकड़ ढीली होने और भाजपा के बढ़ते प्रभाव का स्पष्ट संदेश होगा।

अंतिम परिणाम: रणनीतिक और चुनावी दांव-पेंच पर निर्भर

उपचुनाव का अंतिम नतीजा पूरी तरह से उम्मीदवारों के चयन, पार्टी व्हिप के अनुपालन और मतदान के दिन विधायकों की वास्तविक उपस्थिति पर निर्भर करेगा। हालांकि वर्तमान विधानसभा के आंकड़े भाजपा के पक्ष में झुकते दिख रहे हैं, लेकिन राजनीति में आखिरी क्षण तक कुछ भी निश्चित नहीं होता। टीएमसी अपनी खोई हुई साख को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है, जबकि भाजपा अपनी जीत की लय को बरकरार रखने के लिए प्रयासरत है। 24 जुलाई को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक बिसात पर किसका पलड़ा भारी रहेगा।

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