VitalID: टेक्नोलॉजी की दुनिया में शोधकर्ताओं ने एक अनोखा बायोमेट्रिक सिस्टम विकसित किया है जिसे VitalID कहा जाता है। इसकी सबसे खास बात ये है कि इसमें पासवर्ड, PIN या फिंगरप्रिंट की कोई जरूरत नहीं होती। यह तकनीक आपके शरीर के अंदर पैदा होने वाली हल्की कंपन (वाइब्रेशन) से आपकी पहचान करती है।
शरीर की हलचल से बनती है यूनिक पहचान
आपको बता दें कि, मानव शरीर कभी पूरी तरह स्थिर नहीं रहता। हर सांस और दिल की धड़कन के साथ सूक्ष्म कंपन पैदा होती है जो गर्दन से होकर सिर तक पहुंचती है। सिर की हड्डियों की मोटाई, घनत्व, चेहरे के मसल्स और फैट इन कंपन को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि हर व्यक्ति की वाइब्रेशन का पैटर्न अलग होता है और यही उसकी पहचान बन जाता है।
सिस्टम कैसे काम करता है?
VitalID को इस्तेमाल करने के लिए किसी नए हार्डवेयर की आवश्यकता नहीं है। आजकल के VR और AR हेडसेट्स में मौजूद मोशन सेंसर ही इस काम को कर सकते हैं। ये सेंसर सिर की हल्की कंपन को पकड़ते हैं जो सांस और दिल की धड़कन से उत्पन्न होती हैं। सॉफ्टवेयर सामान्य गतिविधियों जैसे सिर घुमाना या चलना को अलग कर देता है और केवल बायोलॉजिकल सिग्नल को पहचानता है। इसके बाद यह सिग्नल को पहले से सेव प्रोफाइल से मिलाकर यूजर की पहचान की पुष्टि करता है।
सुरक्षा का नया स्तर

चेहरा, फिंगरप्रिंट या आंखों की स्कैनिंग जैसे बायोमेट्रिक सिस्टम को किसी हद तक कॉपी किया जा सकता है। लेकिन सिर की वाइब्रेशन को कॉपी करना लगभग असंभव है। भले ही कोई आपकी सांस लेने की गति की नकल कर ले, लेकिन आपके सिर की संरचना और हड्डियों की बनावट को दोहराना संभव नहीं। यही वजह है कि VitalID को ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है।
परफॉर्मेंस और रिसर्च
इस तकनीक का परीक्षण 10 महीनों तक 52 लोगों पर किया गया। नतीजों में पाया गया कि यह सिस्टम 95% से ज्यादा मामलों में सही यूजर की पहचान करने में सफल रहा और 98% से ज्यादा मामलों में गलत लोगों को पहचानने में भी सफल रहा। इतना ही नहीं, 2025 में एक प्रमुख साइबर सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में इस तकनीक को विशेष सम्मान भी मिला।
भविष्य की लॉगिन टेक्नोलॉजी
जैसे-जैसे VR और AR डिवाइस बैंकिंग, हेल्थ रिकॉर्ड्स और ऑफिस सिस्टम्स तक पहुंच का जरिया बन रहे हैं, वैसे-वैसे सुरक्षित और आसान लॉगिन सिस्टम की जरूरत बढ़ रही है। VitalID इस दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। इसमें यूजर को कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं होगी, बस हेडसेट पहनते ही सिस्टम खुद पहचान लेगा कि असली यूजर कौन है।
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