Viksit Bharat Yuva Samvad: अजित डोभाल का संदेश, ‘इतिहास का बदला’ लेने का वक्त, 2047 तक भारत को विश्वशक्ति बनाने का दिया मंत्र

"इतिहास हमें चुनौती देता है और बदला लेना ही एकमात्र रास्ता है!"—NSA अजीत डोभाल के इस बयान ने देश के युवाओं में जोश भर दिया है। आखिर डोभाल ने 'बदले' की बात क्यों की और भारत मंडपम से उन्होंने युवाओं को कौन सी गुप्त शक्ति पहचानने को कहा है? 2047 की महाशक्ति बनने के लिए डोभाल का 'सीक्रेट प्लान' जानने के लिए पढ़ें।

Viksit Bharat Yuva Samvad

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 10, 2026

Viksit Bharat Yuva Samvad: नई दिल्ली में आयोजित विकसित भारत युवा नेता संवाद के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए देश की सुरक्षा, इतिहास और भविष्य को लेकर सशक्त विचार रखे। अपने भाषण में उन्होंने भारत के अतीत की पीड़ाओं का उल्लेख किया और कहा कि आज जो आज़ादी हमें दिखती है, वह आसान नहीं थी। इसके पीछे हमारे पूर्वजों के असंख्य बलिदान छिपे हुए हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता।

आज़ादी की कीमत और ऐतिहासिक पीड़ा

अजित डोभाल ने कहा कि आज़ाद भारत हमेशा से उतना स्वतंत्र नहीं रहा, जितना आज प्रतीत होता है। देश ने लंबे समय तक अपमान, अत्याचार और असहायता का दौर झेला। कई लोगों को फांसी पर चढ़ाया गया, गांवों को जला दिया गया और हमारी सभ्यता को नष्ट करने की कोशिशें की गईं। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे मंदिरों को लूटा गया और उस समय हम मूक दर्शक बनकर यह सब होते देखते रहे, क्योंकि हमारे पास प्रतिरोध की पर्याप्त शक्ति नहीं थी।

हर युवा में होनी चाहिए बदलाव की आग

NSA डोभाल ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि इतिहास आज के भारत को एक बड़ी चुनौती देता है। उन्होंने कहा कि देश के हर युवा के भीतर बदलाव की आग जलनी चाहिए। हालांकि प्रतिशोध शब्द को उन्होंने आदर्श नहीं बताया, लेकिन यह जरूर कहा कि प्रतिशोध अपने आप में एक शक्तिशाली ऊर्जा है। उनके अनुसार, भारत को फिर से उस मुकाम पर ले जाना होगा जहां हम अपने अधिकारों, अपनी सोच और अपनी मान्यताओं के आधार पर एक महान राष्ट्र का निर्माण कर सकें।

सभ्यता की ताकत और ऐतिहासिक सीख

डोभाल ने भारतीय सभ्यता की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी संस्कृति अत्यंत विकसित रही है। भारत ने कभी दूसरों के धर्मस्थल नहीं तोड़े और न ही लूटपाट के इरादे से किसी देश पर आक्रमण किया। जब दुनिया के कई हिस्से पिछड़े हुए थे, तब भी भारत ने आक्रामक रुख नहीं अपनाया। लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हम अपनी सुरक्षा और संभावित खतरों को समय रहते समझने में असफल रहे, जिसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ा।

इतिहास को याद रखना क्यों जरूरी है

NSA डोभाल ने युवाओं से सवाल करते हुए कहा कि इतिहास ने हमें बार-बार चेतावनी दी है। जब-जब हम खतरों के प्रति उदासीन रहे, हमें भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने पूछा कि क्या हमने उन सबकों को वास्तव में सीखा है और क्या आने वाली पीढ़ियां उन्हें याद रखेंगी। उनके अनुसार, यदि भविष्य की पीढ़ियां इतिहास की इन सीखों को भूल गईं, तो यह भारत के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी।

युद्ध, इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय शक्ति

अपने संबोधन के अंत में अजित डोभाल ने युद्ध और राष्ट्रीय शक्ति की अवधारणा को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इच्छाशक्ति को मजबूत किया जा सकता है और यही इच्छाशक्ति आगे चलकर राष्ट्रीय शक्ति में बदल जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध किसी विकृति या हिंसा के आनंद के लिए नहीं लड़े जाते। युद्ध का उद्देश्य दुश्मन का मनोबल तोड़ना होता है, ताकि वह हमारी शर्तों को मानने के लिए मजबूर हो जाए और देश अपने लक्ष्यों को हासिल कर सके।

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