Election Commission: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) आज रविवार को देश के पांच प्रमुख राज्यों—पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी—के लिए विधानसभा चुनाव 2026 के कार्यक्रमों की घोषणा कर सकता है। इस घोषणा के साथ ही इन राज्यों में चुनावी बिगुल फुक जाएगा और सत्ता का संघर्ष अपने निर्णायक दौर में पहुंच जाएगा।
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निर्वाचन आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस और चुनावी शेड्यूल
बताते चले कि, मीडिया गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, चुनाव आयोग आज एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित कर सकता है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले मतदान चरणों (Polling Phases) और तारीखों का विवरण साझा करना है। आयोग ने पिछले कुछ महीनों में इन राज्यों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों का जायजा लिया है, जिसे अब अंतिम रूप दे दिया गया है।
आदर्श आचार संहिता का कार्यान्वयन
जैसे ही मुख्य चुनाव आयुक्त तारीखों की घोषणा करेंगे, वैसे ही संबंधित राज्यों में आदर्श आचार संहिता (MCC) प्रभावी हो जाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि सरकारें अब किसी भी नई योजना या लोक-लुभावन घोषणाओं को अमली जामा नहीं पहना सकेंगी। प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह से चुनाव आयोग के नियंत्रण में आ जाएगी, ताकि एक निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।
मतगणना की तिथि और चुनावी नतीजे
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इन पांचों राज्यों में चुनावी प्रक्रिया अप्रैल महीने से शुरू होकर मई के पहले सप्ताह तक चलने की संभावना है। वोटों की गिनती (Counting of Votes) और परिणामों की घोषणा मई के शुरुआती दिनों में की जा सकती है। आयोग की कोशिश है कि मानसून की आहट और गर्मी के प्रकोप से पहले मतदान की प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करा लिया जाए।
हाई-प्रोफाइल राज्यों में सियासी महासंग्राम
इस बार के विधानसभा चुनावों में सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की हो रही है। बंगाल में जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपनी सत्ता बचाने की जद्दोजहद में है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) वहां एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के दो दिग्गज—AIADMK और DMK—के बीच कांटे की टक्कर होने की उम्मीद है। केरल में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच पारंपरिक मुकाबला है, तो असम में सत्ता बरकरार रखने की चुनौती होगी।
राजनीतिक दलों की रणनीतियां और प्रचार अभियान
तारीखों के आधिकारिक ऐलान के बाद, सभी राजनैतिक दलों का चुनाव प्रचार (Poll Campaign) अपनी पूरी तीव्रता पर होगा। रैलियों, रोड-शो और जनसभाओं का दौर शुरू हो जाएगा। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक, हर पार्टी मतदाताओं को लुभाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाएगी। उम्मीदवारों के चयन और घोषणापत्र (Manifesto) की प्रक्रिया भी इस घोषणा के तुरंत बाद गति पकड़ लेगी।










