चंडीगढ़.
पुलिस के सामने जड़े थप्पड़ की गूंज अदालत तक पहुंची। शख्स की सुनने की क्षमता 17 प्रतिशत चले जाने पर कोर्ट ने 20 हजार रुपये हर्जाने का फैसला सुनाया, जिस पर पीड़ित ने असंतुष्टि जताते हुए ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही।
तीन मार्च 2025 को 49 साल के इफ्तेकार और मोहम्मद हसन कुरैशी के बीच कहासुनी हो गई थी। मामला दड़वा चौकी तक पहुंच गया था। चौकी में अभी बातचीत चल ही रही थी कि इफ्तेकार एकदम उठा और उसने कुरैशी पर जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। थप्पड़ लगते ही कुरैशी के कान में जोरदार दर्द उठा। उस वक्त तो उसने पुलिस को कोई शिकायत नहीं दी। उसे मनीमाजरा के अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे जीएमसीएच-32 रेफर कर दिया गया। वहां ईएनटी डिपार्टमेंट में उसका इलाज चला, जिसमें पता चला कि उसके एक कान की सुनने की क्षमता 17 प्रतिशत कम हो गई।
डाॅक्टर की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने इफ्तेकार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 117(2) के तहत केस दर्ज कर लिया। जिला अदालत में करीब डेढ़ साल तक मुकदमा चला और अदालत ने इफ्तेकार अहमद को दोषी करार दे दिया। अदालत में 17 प्रतिशत सुनने की क्षमता कम होने वाला तथ्य भी डाॅक्टर की गवाही से साबित हो गया। ऐसे में अदालत ने इफ्तेकार को पर 20 हजार रुपये जुर्माना लगा दिया। उसे यह रकम कुरैशी को बतौर मुआवजा अदा करनी होगी। वहीं, अदालत ने 49 साल के इफ्तेकार को जेल भेजने की बजाय उसे अच्छे आचरण की शर्त पर छोड़ दिया। अदालत ने कहा कि वह आदतन अपराधी नहीं है और उसने केवल एक थप्पड़ ही मारा है। इसलिए अदालत ने सजा में नरमी दिखाई। हालांकि पीड़ित कुरैशी इस फैसले से संतुष्ट नहीं है।
फैसले को चुनौती दूंगा : कुरैशी
मो. हसन कुरैशी का कहना है कि वह अदालत के फैसले से खुश नहीं हैं। दोषी ने उसे इतनी तेज थप्पड़ मारा था कि उसकी सुनने की क्षमता 17 प्रतिशत चली गई। अदालत ने उस पर जो 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया कि वह उसके लिए कोई सबक नहीं है। इसलिए मैं इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दूंगा।










