Venezuela Crisis: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने एक महत्वपूर्ण इंटरव्यू में घोषणा की है कि वह नशीली दवाओं (ड्रग्स) की तस्करी को रोकने के लिए अमेरिका के साथ एक समझौते पर बातचीत करने के लिए तैयार हैं। स्टेट टेलीविजन पर प्रसारित इस रिकॉर्डेड इंटरव्यू में मादुरो का लहजा पहले के मुकाबले कुछ नरम दिखाई दिया, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की बातचीत बराबरी के आधार पर होनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच संबंधों में जबरदस्त कड़वाहट बनी हुई है।
Venezuela Crisis: CIA के हमले पर चुप्पी और अमेरिका की मंशा पर सवाल
इंटरव्यू के दौरान मादुरो ने पिछले हफ्ते वेनेजुएला के डॉकिंग एरिया में सीआईए (CIA) के नेतृत्व में हुए संदिग्ध हमले पर सीधा कमेंट करने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का मानना था कि इस क्षेत्र का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल द्वारा किया जा रहा था। स्पेनिश पत्रकार इग्नासियो रामोनेट से बात करते हुए मादुरो ने आरोप लगाया कि अमेरिका का असली मकसद ड्रग्स रोकना नहीं, बल्कि वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) करना है। उन्होंने दावा किया कि कैरेबियन सागर में अमेरिकी सैन्य तैनाती का असली उद्देश्य वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर नियंत्रण हासिल करना है। उन्होंने कहा, “वे धमकियों और ताकत के दम पर अपनी मर्जी थोपना चाहते हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि हम गंभीरता से डेटा के साथ बात करें।”
Venezuela Crisis: अमेरिकी निवेश के लिए वेनेजुएला के दरवाजे खुले: तेल और व्यापार पर चर्चा
निकोलस मादुरो ने व्यापारिक कूटनीति का कार्ड खेलते हुए कहा कि वेनेजुएला अमेरिकी निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विशेष रूप से तेल क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि यदि अमेरिका को ऊर्जा सुरक्षा और तेल की आवश्यकता है, तो वेनेजुएला उनके निवेश का स्वागत करेगा। उन्होंने अमेरिकी तेल कंपनी ‘शेवरॉन’ का उदाहरण देते हुए कहा कि हम इसी तरह के अन्य समझौतों के लिए भी तैयार हैं— “वे जब चाहें, जहां चाहें और जैसे भी चाहें, निवेश कर सकते हैं।” बता दें कि शेवरॉन वर्तमान में एकमात्र बड़ी अमेरिकी कंपनी है जो वेनेजुएला से कच्चा तेल अमेरिका को निर्यात करने का अधिकार रखती है।
ट्रंप प्रशासन का सख्त रुख और सैन्य कार्रवाई का बढ़ता दायरा
वेनेजुएला के इस नरम रुख के उलट, वाशिंगटन से लगातार कड़े संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ ‘सशस्त्र संघर्ष’ छेड़ रखा है। नए साल की पूर्व संध्या पर अमेरिकी सेना ने 5 संदिग्ध नावों को निशाना बनाने की पुष्टि की थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक ऐसे हमलों की कुल संख्या 35 हो चुकी है, जिसमें कम से कम 115 लोग मारे गए हैं। ट्रंप ने इन सैन्य ऑपरेशनों को अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य कदम बताया है। उनका तर्क है कि ड्रग कार्टेल अमेरिका के खिलाफ अघोषित युद्ध लड़ रहे हैं और वेनेजुएला की जमीन का इस्तेमाल इसके लिए हो रहा है।
कूटनीति और संघर्ष के बीच फंसा भविष्य
निकोलस मादुरो का यह प्रस्ताव एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है ताकि वेनेजुएला पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में कुछ ढील मिल सके और देश की चरमराई अर्थव्यवस्था को सहारा मिले। हालांकि, ट्रंप प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति और लगातार हो रहे सैन्य हमलों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि क्या अमेरिका इस बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार करेगा। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों देश वास्तव में “हाथ में डेटा लेकर” मेज पर बैठते हैं या कैरेबियन सागर में बारूद की गंध और तेज होती है।










