Venezuela Crisis 2026: डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के भविष्य को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने के बाद अब वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधनों पर अमेरिका का सीधा नियंत्रण होगा। ट्रंप के इस रुख ने न केवल दक्षिण अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
Venezuela Crisis 2026 : वेनेजुएला के तेल भंडार और प्रशासन पर ट्रंप की रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि निकोलस मादुरो के हटने के बाद वेनेजुएला के तेल भंडारों का दोहन अब अमेरिका द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका न केवल इन तेल संसाधनों का प्रबंधन करेगा, बल्कि दुनिया के अन्य देशों को भी बड़ी मात्रा में तेल बेचेगा। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि जब तक सत्ता का सुरक्षित और स्थायी हस्तांतरण सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका ही वेनेजुएला का शासन और प्रशासन संभालेगा। उनके अनुसार, वे पिछले कई वर्षों की अस्थिरता को दोबारा नहीं लौटने देना चाहते, इसलिए देश का संचालन खुद करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, इस प्रशासनिक नियंत्रण के लिए कोई निश्चित समयसीमा अभी तय नहीं की गई है।
Venezuela Crisis 2026: सैन्य कार्रवाई का विवरण और मादुरो की गिरफ्तारी
ट्रंप ने वेनेजुएला में हुई सैन्य कार्रवाई की जानकारी देते हुए दावा किया कि वेनेजुएला की सेना इस हमले के लिए तैयार थी, लेकिन अमेरिकी ताकत के सामने वह पूरी तरह पराजित हो गई। उन्होंने बताया कि इस संघर्ष में कुछ अमेरिकी सैनिक घायल जरूर हुए हैं, लेकिन किसी के मारे जाने की खबर नहीं है। मादुरो की गिरफ्तारी के बारे में बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई ‘अंधेरे’ में की गई। उन्होंने काराकास (वेनेजुएला की राजधानी) की स्थिति का वर्णन करते हुए कहा कि वहां चारों तरफ अंधेरा और खतरनाक माहौल था, लेकिन अमेरिका ने वह हासिल किया जो दुनिया का कोई और देश नहीं कर सकता था।
ड्रग तस्करी के खिलाफ बड़ी कामयाबी का दावा
इस सैन्य हस्तक्षेप के साथ-साथ ट्रंप ने नशीली दवाओं के खिलाफ युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी बलों ने समुद्र के रास्ते आने वाली लगभग 97 फीसदी नशीली दवाओं को नष्ट कर दिया है। ट्रंप ने मादुरो सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी ओर से भेजी जाने वाली प्रत्येक ‘ड्रग बोट’ औसतन 25,000 निर्दोष लोगों की जान लेती थी। इस कार्रवाई को उन्होंने मानवता और अमेरिकी सुरक्षा के लिए एक बड़ी जीत करार दिया है।
संयुक्त राष्ट्र की चिंता: ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’
वेनेजुएला में अमेरिका की इस सीधी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति की गिरफ्तारी पर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने कड़ी आपत्ति जताई है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे एक “खतरनाक मिसाल” बताया है। उनके प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने बयान जारी कर कहा कि महासचिव इस घटनाक्रम से बेहद चिंतित हैं क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है। यूएन का मानना है कि इस तरह के सैन्य हस्तक्षेप से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता खतरे में पड़ सकती है और भविष्य के लिए एक गलत उदाहरण पेश हो सकता है।
रूस और ईरान का कड़ा विरोध
रूस ने अमेरिकी एयरस्ट्राइक और जमीनी कार्रवाई की तीखी निंदा की है। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका द्वारा दिए जा रहे तर्क बेकार हैं और यह पूरी तरह से विचारधारा की दुश्मनी का परिणाम है। रूस का मानना है कि लैटिन अमेरिका को एक शांतिपूर्ण क्षेत्र बने रहना चाहिए और वेनेजुएला की जनता को बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अपना भविष्य चुनने का अधिकार होना चाहिए। ईरान और अन्य मित्र देशों ने भी इसे संप्रभुता पर हमला बताया है।
चीन की बढ़ती मुश्किलें और आर्थिक चिंताएं
अमेरिकी दखल के बाद सबसे अधिक चिंता चीन के खेमे में देखी जा रही है। चीन वेनेजुएला के तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है और उसने वहां अरबों डॉलर का निवेश और कर्ज दे रखा है। अब जबकि तेल भंडार अमेरिका के नियंत्रण में हैं, शी जिनपिंग सरकार को अपने निवेश और ऊर्जा आपूर्ति की चिंता सता रही है। चीन के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा है कि अमेरिका को दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए।
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