VB-G RAM G योजना पर केंद्र-तमिलनाडु टकराव तेज, सीएम विजय ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

वीबी-जी राम जी योजना को लेकर केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर योजना से जुड़े मुद्दों पर आपत्ति जताई है। आखिर इस विवाद की असली वजह क्या है और आगे इसका क्या असर हो सकता है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

VB-G RAM G

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 2, 2026

VB-G RAM G : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार द्वारा 1 जुलाई 2026 से लागू की गई नई योजना ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’ (VB-G RAM G) पर गहरी चिंता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक विस्तृत पत्र में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस योजना के नए फंडिंग ढांचे के कारण राज्य सरकार को 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त वित्तीय भार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि राज्य की वित्तीय स्थिति और ग्रामीण विकास की जरूरतों को देखते हुए फंडिंग के अनुपात में तत्काल संशोधन किया जाए।

MGNREGA से अचानक बदलाव राज्यों के लिए व्यावहारिक नहीं

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि पिछले दो दशकों से सफलतापूर्वक चल रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) से रातों-रात इस नई व्यवस्था में शिफ्ट होना राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण है। नए कानून के तहत केंद्र और राज्य के बीच 60:40 का जो खर्च अनुपात तय किया गया है, वह राज्यों के बजट पर भारी असर डालेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस बोझ के चलते राज्य को या तो रोजगार के दिनों की संख्या घटाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा या फिर अन्य आवश्यक जनकल्याणकारी योजनाओं की धनराशि में कटौती करनी पड़ेगी। उन्होंने केंद्र से मांग की है कि मजदूरी और प्रशासनिक व्यय का 100 प्रतिशत हिस्सा केंद्र वहन करे, जबकि सामग्री (मटीरियल) लागत को 75:25 के अनुपात में विभाजित किया जाए।

ग्राम पंचायत स्तर पर स्वायत्तता और लचीलेपन की मांग

मुख्यमंत्री विजय ने योजना के क्रियान्वयन में राज्यों को अधिक स्वायत्तता देने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने केंद्रीय स्तर पर ग्राम पंचायतों के वर्गीकरण और फंड आवंटन के तरीके को ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ करार दिया। मुख्यमंत्री का मानना है कि एक ही राष्ट्रीय फॉर्मूला हर राज्य की सामाजिक-आर्थिक विविधताओं के अनुकूल नहीं हो सकता। उन्होंने मांग की है कि फंड वितरण का अधिकार राज्य सरकारों को मिलना चाहिए, ताकि वे अपनी विशिष्ट स्थानीय जरूरतों और वास्तविक आवश्यकताओं के अनुसार निर्णय ले सकें।

जलवायु परिवर्तन और खेती के चक्र की जमीनी चुनौतियां

नए एक्ट में साल में 60 दिन काम रोकने की जो अनिवार्यता है, उस पर भी मुख्यमंत्री ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि अल-नीनो और जलवायु परिवर्तन के कारण अब खेती का चक्र पूरी तरह बदल चुका है। ऐसे में पहले से निश्चित की गई 60 दिनों की अवधि के बजाय यह अधिकार जिला कलेक्टरों के पास होना चाहिए, जो स्थानीय मौसम और फसल की स्थिति को देखकर इन दिनों का निर्धारण कर सकें। लचीलापन होने से ही किसान और खेतिहर मजदूर सही समय पर अपनी आजीविका सुरक्षित रख पाएंगे।

महात्मा गांधी के नाम और आवास योजना का महत्व

अंत में, मुख्यमंत्री ने योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रपिता की विरासत और उनके प्रति सम्मान बनाए रखने के लिए योजना में उनका नाम यथावत रहना चाहिए। साथ ही, उन्होंने केंद्र से अपील की है कि राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित आवास योजनाओं को भी इस एक्ट के दायरे में लाया जाए, ताकि ‘सभी के लिए आवास’ का लक्ष्य समय रहते पूरा किया जा सके। मुख्यमंत्री का यह रुख सहकारी संघवाद और राज्यों के अधिकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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