वट सावित्री व्रत 2026: परिक्रमा के दौरान इस मंत्र से मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

आज यानी 16 मई को देश भर में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए वट सावित्री का व्रत रख रही हैं.  इस दिन बरगद (वट) के पेड़ की पूजा और परिक्रमा का सबसे ज्यादा महत्व होता है.  शास्त्रों के अनुसार, अगर आज परिक्रमा करते समय एक विशेष मंत्र का जाप किया जाए, तो पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. आज पूजा का सबसे उत्तम समय अगर आप आज पूजा करने जा रही हैं, तो समय का खास ख्याल रखें. ज्योतिषियों के मुताबिक, आज पूजा का सबसे

Wrriten By :

Editor

Published On :

मई 16, 2026

आज यानी 16 मई को देश भर में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए वट सावित्री का व्रत रख रही हैं.  इस दिन बरगद (वट) के पेड़ की पूजा और परिक्रमा का सबसे ज्यादा महत्व होता है.  शास्त्रों के अनुसार, अगर आज परिक्रमा करते समय एक विशेष मंत्र का जाप किया जाए, तो पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है.

आज पूजा का सबसे उत्तम समय
अगर आप आज पूजा करने जा रही हैं, तो समय का खास ख्याल रखें. ज्योतिषियों के मुताबिक, आज पूजा का सबसे महाशुभ मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त) सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक है.  इस 54 मिनट के दौरान पूजा और परिक्रमा करना बेहद फलदायी माना गया है.

परिक्रमा करते समय इस मंत्र का करें जाप
बरगद के पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत या कलावा लपेटते हुए महिलाओं को कम से कम 7 या 11 बार परिक्रमा करनी चाहिए.  परिक्रमा के दौरान मन ही मन इस पौराणिक मंत्र का जाप करना चाहिए:

"यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च।
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिण पदे-पदे।।"

इसका आसान अर्थ क्या है?
इस मंत्र का मतलब है कि जाने-अनजाने में हमारे इस जन्म या पिछले जन्मों के जो भी पाप या कमियां रही हों, इस पवित्र वृक्ष की परिक्रमा (प्रदक्षिणा) के हर एक कदम के साथ वे सभी नष्ट हो जाएं और हमारे परिवार में सुख-शांति आए.

बरगद की पूजा क्यों है इतनी खास?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ की जड़ों में ब्रह्मा जी, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं (डालियों) में साक्षात शिव जी का वास होता है. इसके साथ ही, सावित्री ने इसी पेड़ के नीचे अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे.  यही वजह है कि आज के दिन इस पेड़ की पूजा करने से तीनों देवों के साथ माता सावित्री का भी आशीर्वाद एक साथ मिल जाता है.

Leave a Comment