Vantara News: सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्र से जुड़े मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया। यह केंद्र रिलायंस ग्रुप द्वारा संचालित है। अदालत ने कहा कि इस मामले की जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और किसी भी प्रकार के कानून उल्लंघन का प्रमाण नहीं मिला है। जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर चुका है। SIT ने सितंबर 2025 में अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया था। रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि वनतारा में वन्यजीव आयात के दौरान किसी भी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं हुआ।
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अदालत की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब किसी आयात को वैध अनुमति के तहत किया गया हो, तो बाद में उठाई गई आपत्तियों के आधार पर उसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने यह भी जोड़ा कि इस तरह के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप से जानवरों के कल्याण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यदि पहले से स्थापित वातावरण और देखभाल में रह रहे जानवरों को हटाया या परेशान किया गया, तो यह स्वयं क्रूरता का कारण बन सकता है। अदालत के अनुसार, कानूनी रूप से आयात किए गए और बचाए गए जानवरों के वातावरण और देखभाल में हस्तक्षेप करना उनके लिए हानिकारक हो सकता है।
मामला क्या था
याचिकाकर्ता ने अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार संधि (CITES) के एक दस्तावेज का हवाला दिया था। लेकिन अदालत ने पाया कि यह दस्तावेज आरोपों का समर्थन नहीं करता। इसके विपरीत, CITES सचिवालय ने कहा था कि जानवरों के आयात में आवश्यक दस्तावेजों या परमिट की कमी का कोई प्रमाण नहीं मिला और न ही यह संकेत मिला कि आयात व्यावसायिक उद्देश्य से किए गए थे।
याचिका की मांगें
याचिका में वाइल्डलाइफ इंपोर्ट से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, एक स्वतंत्र निगरानी समिति गठित करने और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने कहा कि ये सभी मुद्दे पहले ही निपटाए जा चुके हैं। इसी आधार पर शीर्ष अदालत ने याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला वनतारा केंद्र के लिए बड़ी राहत है। अदालत ने साफ कर दिया कि वैध अनुमति के तहत किए गए आयात को चुनौती देना उचित नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अनावश्यक हस्तक्षेप से जानवरों के कल्याण पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इस प्रकार, वनतारा से जुड़ी याचिका को अदालत ने बिना मेरिट का करार देते हुए खारिज कर दिया।









