Vande Mataram Row: ‘ऐतिहासिक भूल है’, बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी

वंदे मातरम को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर बैंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार तक पहुंच गया है। उनके प्रत्यक्ष वंशज और BJP विधायक सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कथित घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने इसे ऐतिहासिक भूल बताते हुए बिना शर्त माफी की मांग की है।

Vande Mataram Row

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 16, 2026

Vande Mataram Row:  भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के कथित अपमान को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब और तेज हो गया है। पश्चिम बंगाल के नैहाटी से बीजेपी विधायक सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताई है। सुमित्रो चटर्जी खुद राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रत्यक्ष वंशज होने का दावा करते हैं। उन्होंने कथित घटना को लेकर देशवासियों और खासकर पश्चिम बंगाल की जनता से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है।

सोनिया गांधी को पत्र लिखकर जताई नाराजगी

सुमित्रो चटर्जी ने अपने पत्र में कहा कि जब पूरा देश स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मातृभूमि के सम्मान और देशभक्ति की भावना में डूबा था, उसी समय कांग्रेस मुख्यालय में सामने आया घटनाक्रम बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया। बीजेपी विधायक ने इसे इतिहास की एक गंभीर गलती के दोहराव जैसा करार दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे ने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर भी काफी आहत किया है।

कांग्रेस मुख्यालय की घटना पर लगाए गंभीर आरोप

बीजेपी विधायक ने दावा किया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण संस्करण गाए जाने के दौरान सोनिया गांधी कथित तौर पर असहज नजर आईं और गीत को रोकने का प्रयास किया गया। चटर्जी ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार के प्रत्यक्ष वंशज और देश के एक नागरिक के तौर पर वह इस घटना से बेहद दुखी हैं। हालांकि, कांग्रेस पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुकी है।

स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया

अपने पत्र में सुमित्रो चटर्जी ने ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने श्री अरविंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों में राष्ट्रभक्ति और आजादी की भावना को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके मुताबिक, इस गीत ने खुदीराम बोस जैसे कई क्रांतिकारियों को भी प्रेरित किया।

बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन का जिक्र

बीजेपी विधायक ने बंगाल विभाजन के बाद हुए स्वदेशी आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने राष्ट्रवादी नेता बिपिन चंद्र पाल के लेखन का हवाला देते हुए कहा कि उस दौर में यह गीत आंदोलनकारियों और क्रांतिकारियों के बीच बेहद लोकप्रिय था। उन्होंने ‘स्वदेशी’, ‘बहिष्कार’ और ‘वंदे मातरम्’ को उस समय के प्रमुख राष्ट्रवादी प्रतीकों के रूप में पेश किया।

कांग्रेस अधिवेशन से लेकर तिलक तक का उल्लेख

चटर्जी ने अपने पत्र में 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वहां सरला देवी चौधरानी ने ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण का गायन किया था। इसके अलावा उन्होंने 1909 में बाल गंगाधर तिलक के राजद्रोह मुकदमे के दौरान उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए ‘वंदे मातरम्’ के नारों का भी उल्लेख किया।

रवींद्रनाथ टैगोर से भी जुड़ा गीत का इतिहास

बीजेपी विधायक ने ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास को महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि टैगोर ने 1896 में कलकत्ता में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में इस गीत का गायन किया था। चटर्जी ने टैगोर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि गीत के शब्द लोगों के बीच मौजूद विभाजन और बाधाओं को दूर कर उनके दिलों को जोड़ने की क्षमता रखते हैं।

कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को बताया गलत

वहीं, कांग्रेस इस पूरे विवाद में बीजेपी के आरोपों को पहले ही खारिज कर चुकी है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि पार्टी मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ का अपमान नहीं हुआ और गीत को बीच में रोकने का दावा गलत है। कांग्रेस का कहना है कि कार्यक्रम से जुड़ी घटना को बीजेपी ने गलत संदर्भ में पेश किया। दूसरी ओर, बीजेपी लगातार कांग्रेस नेताओं से इस मामले में स्पष्टीकरण और माफी की मांग कर रही है। फिलहाल दोनों दलों के बीच यह विवाद राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

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