Vande Mataram Controversy: केरल में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के तहत राज्य में आयोजित होने वाले सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण सामूहिक रूप से गाने की बात सामने आई है। इसके बाद केरल की यूडीएफ सरकार के मंत्रियों और कांग्रेस नेताओं ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। राज्य सरकार का कहना है कि उसके कार्यक्रमों में पहले की तरह वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्र के निर्देशों पर जताई आपत्ति
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने इस मामले में राज्य सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव ने केंद्र के निर्देशों के आधार पर परिपत्र जारी किया होगा, लेकिन राज्य सरकार अपने कार्यक्रमों में मौजूदा व्यवस्था के अनुसार ही राष्ट्रगीत का गायन कराएगी। उनके मुताबिक केंद्र का प्रोटोकॉल राजभवन में राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों पर लागू हो सकता है, लेकिन राज्य सरकार के आयोजनों को लेकर अलग व्यवस्था कायम रहेगी।
मुख्य सचिव के पत्र से शुरू हुआ पूरा विवाद
दरअसल, विवाद की शुरुआत केरल के मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा की ओर से 6 अगस्त को जारी पत्र के बाद हुई। पत्र में ‘हर घर तिरंगा’ और ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ जैसे अभियानों के तहत आयोजित कार्यक्रमों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण का सामूहिक गायन करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद राज्य के राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई।
कांग्रेस सांसद ने भी जताया विरोध
कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने भी सरकार के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के गायन का विरोध किया। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि केरल में इस जन्म में पूरा वंदे मातरम् नहीं गाया जाएगा। उन्होंने राजभवन पर भी राजनीतिक मुद्दों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। सांसद के बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
माकपा ने सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
विपक्षी दल माकपा ने भी इस विवाद को लेकर राज्य सरकार को निशाने पर लिया है। माकपा नेता पी. राजीव ने आरोप लगाया कि इस तरह के निर्देशों के जरिए सरकार आरएसएस के एजेंडे के सामने झुक रही है और ऐसे फैसले भाजपा को राजनीतिक लाभ पहुंचा सकते हैं। माकपा ने मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र को वापस लेने की मांग की है।
भाजपा ने भी सरकार से मांगा जवाब
दूसरी ओर भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि राज्यपाल कार्यालय ने किसी तरह का निर्देश जारी करने से इनकार किया है, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मुख्य सचिव ने किसके निर्देश पर यह पत्र जारी किया। भाजपा ने सरकार से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
राष्ट्रगीत के प्रोटोकॉल पर बढ़ी सियासी तकरार
फिलहाल केरल में वंदे मातरम् के गायन को लेकर सरकार, कांग्रेस, माकपा और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। एक तरफ केंद्र के निर्देशों के अनुसार पूर्ण संस्करण के सामूहिक गायन की बात सामने आई है, वहीं राज्य सरकार अपने पुराने प्रोटोकॉल पर कायम रहने की बात कह रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा केरल की राजनीति में और गरमा सकता है। हालांकि, अंतिम स्थिति सरकारी कार्यक्रमों में लागू होने वाले आधिकारिक प्रोटोकॉल और राज्य सरकार के फैसले से ही स्पष्ट होगी।
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