
Uttarakhand News: उत्तराखंड के टिहरी जिले में अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। अब केवल अवैध निर्माण करने वालों पर ही नहीं, बल्कि उनकी निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले अभियंताओं के कामकाज पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डीपी सिंह ने लंबे समय से एक ही क्षेत्र में तैनात अवर अभियंताओं के कार्यक्षेत्र और दायित्वों में बदलाव किया है। जिन अभियंताओं के संबंध में शिकायतें मिली थीं, उनके कामकाज में भी परिवर्तन किया गया है। प्राधिकरण का स्पष्ट निर्देश है कि अवैध निर्माण को तत्काल रुकवाया जाए और सील किए गए भवनों में दोबारा किसी भी तरह का निर्माण कार्य न होने दिया जाए।
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लंबे समय से एक ही जिम्मेदारी संभाल रहे अभियंताओं के कार्यक्षेत्र बदले

टिहरी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण ने अवैध निर्माणों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं। उपाध्यक्ष डीपी सिंह ने लंबे समय से एक ही जिम्मेदारी संभाल रहे अवर अभियंताओं के दायित्वों में बदलाव किया है। इसका उद्देश्य निर्माण गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, प्रशासनिक बदलाव के बाद चिह्नित स्थानों पर चल रहे अवैध निर्माण कार्यों को रुकवाया गया है। प्राधिकरण ने सहायक अभियंताओं और अवर अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित रूप से निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अवैध निर्माण की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचने को कहा गया है।
समेकित सूची में 55 सील भवन, तपोवन में सबसे ज्यादा
प्राधिकरण की उपलब्ध समेकित सूची के मुताबिक, टिहरी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 55 सील भवन दर्ज हैं। इनमें तपोवन में 38 भवन, कैम्पटी में नौ, चंबा में चार और मुनिकीरेती में चार भवन शामिल हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, सूची में दर्ज सील भवनों की सबसे अधिक संख्या तपोवन में है।
इसके अतिरिक्त, जून से अक्टूबर 2026 की अलग अवधि वाली प्रविष्टियों में चंबा में एक सीलिंग और तपोवन में दो री-सीलिंग दर्ज की गई हैं। इसी अवधि में कुल 81 नोटिस का भी उल्लेख है। ये आंकड़े अवैध निर्माण से संबंधित कार्रवाई और निगरानी गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हैं।
सीलिंग के बाद दोबारा निर्माण रोकने पर विशेष जोर

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि किसी भवन को सील किए जाने के बाद वहां दोबारा निर्माण कार्य शुरू नहीं होना चाहिए। इसके लिए संबंधित अभियंताओं को मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अवैध और सील किए गए निर्माणों की निगरानी में ड्रोन की मदद भी ली जा रही है। इससे चिह्नित स्थानों पर निर्माण गतिविधियों पर नजर रखने में सहायता मिल सकती है।
लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी
अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्राधिकरण ने निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर दिया है। शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने या अपने क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन को नजरअंदाज करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
अब इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि रोके गए निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध बरकरार रहता है या नहीं और सील किए गए भवनों की निगरानी कितनी नियमितता से की जाती है। प्राधिकरण के सामने चुनौती केवल अवैध निर्माणों को सील करने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि कार्रवाई के बाद नियमों का उल्लंघन दोबारा न हो।
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