Uttarakhand News: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट रविवार, 11 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। नवरात्रि के पावन अवसर पर सुबह विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी की गई। सुबह 7 बजकर 15 मिनट पर पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष की नियमित दर्शन व्यवस्था का समापन हो गया।
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कपाट बंद करने से पहले हुई विशेष पूजा-अर्चना
मंदिर के कपाट बंद करने से पहले भगवान लक्ष्मण की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा संपन्न होने के बाद कपाट बंद किए गए। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का माहौल रहा। कपाट बंद होने का अवसर क्षेत्र की धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान मौसम कठिन हो जाता है और नियमित यात्रा व दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती है।
हेमकुंड साहिब के कपाट भी एक दिन पहले हुए बंद

लोकपाल लक्ष्मण मंदिर से पहले शनिवार को प्रसिद्ध सिख तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। वहां अंतिम अरदास में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस वर्ष हेमकुंड साहिब में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 3.84 लाख से अधिक रही। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा बताया गया है। कपाट बंद होने के अवसर पर पाकिस्तान से आए करीब 40 श्रद्धालुओं का जत्था भी मौजूद रहा।
हेमालयी तीर्थस्थलों पर समाप्त हुआ इस वर्ष का यात्रा सत्र
हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर दोनों ही चमोली जिले के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। हर वर्ष देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गर्मियों और अनुकूल मौसम के दौरान यहां यात्रा की गतिविधियां बढ़ती हैं, जबकि सर्दियों में बर्फबारी और कठिन परिस्थितियों के कारण कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस वर्ष भी निर्धारित धार्मिक परंपराओं के अनुसार दोनों स्थलों के कपाट बंद होने के साथ नियमित दर्शन का सत्र समाप्त हो गया।
श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक परंपरा का विशेष महत्व
लोकपाल लक्ष्मण मंदिर में कपाट बंद होने की प्रक्रिया केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर भी है। भगवान लक्ष्मण के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कपाट बंद होने के बाद अगली यात्रा अवधि का इंतजार रहेगा। वहीं, हेमकुंड साहिब में इस वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना तीर्थयात्रा के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाता है।
अब अगले यात्रा सत्र का रहेगा इंतजार
कपाट बंद होने के बाद अब दोनों धार्मिक स्थलों पर शीतकालीन अवधि के दौरान नियमित दर्शन नहीं हो सकेंगे। मौसम की परिस्थितियों और परंपराओं के अनुरूप अगले यात्रा सत्र में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था दोबारा शुरू होगी। फिलहाल, चमोली के इन प्रमुख तीर्थस्थलों में इस वर्ष की यात्रा गतिविधियां संपन्न हो चुकी हैं और श्रद्धालु अगले अवसर पर दर्शन करने की प्रतीक्षा करेंगे।
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