Uttarakhand News: BRICS सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, आपदा प्रबंधन और विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में सहमति बनी है। इन पहलों का असर आने वाले समय में भारत के पहाड़ी राज्यों पर भी दिखाई दे सकता है। विशेष रूप से उत्तराखंड जैसे राज्य, जहां प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ भूस्खलन, बाढ़ और हिमनदों से जुड़ी चुनौतियां बनी रहती हैं, इन अंतरराष्ट्रीय सहयोगों से लाभ उठा सकते हैं।
Uttarakhand News: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, वन विकास
पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण पर जोर
BRICS के स्तर पर पर्यावरण और जैव विविधता से जुड़े सहयोग को महत्वपूर्ण माना गया है। पहाड़ी राज्यों के लिए यह पहल इसलिए अहम है क्योंकि हिमालयी क्षेत्र जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। उत्तराखंड में जंगल, हिमनद, नदियां और पर्वतीय पारिस्थितिकी स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास को आगे बढ़ाने वाली तकनीक और अनुभव साझा होने से राज्य को दीर्घकालिक स्तर पर फायदा मिल सकता है।
आपदा प्रबंधन में बेहतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग

नई दिल्ली घोषणापत्र में आपदा प्रबंधन और पूर्व चेतावनी प्रणालियों से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान पर सहयोग की बात सामने आई है। पहाड़ी क्षेत्रों के लिए इसका विशेष महत्व है, क्योंकि यहां बादल फटने, अचानक बाढ़, भूस्खलन और हिमनदों से जुड़ी घटनाएं चुनौती पैदा करती हैं।
यदि अलग-अलग देशों के बीच मौसम, जलवायु और आपदा संबंधी सूचनाएं तेजी से साझा की जाती हैं, तो संवेदनशील इलाकों में पहले से तैयारी करने में मदद मिल सकती है। इससे राहत एवं बचाव व्यवस्था को भी समय रहते सक्रिय किया जा सकेगा।
हिमनदों की निगरानी में मिल सकती है नई तकनीक
हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों की स्थिति और उनके बदलावों की निगरानी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। BRICS देशों के पास हिमनद निगरानी और पर्वतीय क्षेत्रों के अध्ययन से जुड़े अनुभव और तकनीकी क्षमताएं हैं।
इन अनुभवों का इस्तेमाल उत्तराखंड के संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने में किया जा सकता है। जोशीमठ जैसे भूगर्भीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक, रिमोट सेंसिंग और शुरुआती चेतावनी प्रणालियां जोखिमों की पहचान में उपयोगी हो सकती हैं।
स्थानीय कृषि उत्पादों को मिल सकता है बड़ा बाजार
BRICS देशों के बीच कृषि सहयोग और अनाज के आदान-प्रदान से जुड़ी पहल का फायदा उत्तराखंड के पारंपरिक कृषि उत्पादों को भी मिल सकता है। राज्य में मंडुवा, झंगोरा, राजमा और अन्य स्थानीय उत्पादों की अपनी अलग पहचान है। यदि इन उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान होती है, तो किसानों और स्थानीय उत्पादकों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे पारंपरिक खेती को प्रोत्साहन मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
न्यू डेवलपमेंट बैंक से बुनियादी ढांचे को उम्मीद
BRICS का New Development Bank विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में काम करता है। भविष्य में इस तरह के सहयोग से पहाड़ी राज्यों में सड़क, परिवहन, जल प्रबंधन, शहरी ढांचे और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं को समर्थन मिलने की संभावनाएं बन सकती हैं। उत्तराखंड जैसे राज्य के लिए चुनौती यह होगी कि विकास परियोजनाओं को पर्यावरणीय संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ाया जाए। अंतरराष्ट्रीय अनुभव, तकनीकी सहयोग और वित्तीय संसाधनों का संतुलित इस्तेमाल राज्य के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है।
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