Uttarakhand News: लाखों की फीस के बावजूद खाली रह गईं मेडिकल सीटें, क्या फिर खुलेगा दाखिले का रास्ता?

उत्तराखंड में नीट यूजी दाखिले पूरे होने के बाद भी एमबीबीएस की 32 और बीडीएस की छह सीटें खाली हैं। अब इन सीटों को भरने के लिए विशेष काउंसलिंग की उम्मीद जगी है। क्या एमसीसी इसकी अनुमति देगी? जानिए किन कॉलेजों में सीटें रिक्त हैं और छात्रों को कैसे मिलेगा मौका।

लाखों की फीस के बावजूद खाली रह गईं मेडिकल सीटें

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

नवम्बर 2, 2026

Uttarakhand News: उत्तराखंड में नीट यूजी के जरिए मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कई सीटें खाली रह गई हैं। प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 32 सीटों पर प्रवेश नहीं हो सका, जबकि दोनों डेंटल कॉलेजों में बीडीएस की छह सीटें रिक्त हैं। इन खाली सीटों को भरने के लिए अब विशेष काउंसलिंग कराए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

इस संबंध में एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) से अनुमति और आगे की प्रक्रिया को लेकर दिशा-निर्देश मांगे हैं। यदि एमसीसी की ओर से मंजूरी मिलती है, तो मेडिकल में दाखिले की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों को एक और अवसर मिल सकता है।

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एमबीबीएस की 32 सीटें खाली

नीट यूजी के तहत प्रदेश में एमबीबीएस दाखिले की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी निजी मेडिकल कॉलेजों की 32 सीटें खाली रह गई हैं। इनमें श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज, गौतम बुद्ध मेडिकल कॉलेज और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज शामिल हैं। इन संस्थानों में रिक्त सीटों पर दाखिले नहीं हो पाने के बाद संबंधित कॉलेजों ने एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया है। कॉलेजों ने खाली सीटों को भरने के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है।

दोनों डेंटल कॉलेजों में बीडीएस की छह सीटें रिक्त

एमबीबीएस के साथ-साथ प्रदेश में बीडीएस पाठ्यक्रम की सीटें भी खाली रह गई हैं। उत्तराखंड के दोनों डेंटल कॉलेजों में कुल छह सीटों पर प्रवेश नहीं हो पाया है। दाखिले की निर्धारित प्रक्रिया समाप्त होने के बावजूद सीटें रिक्त रहने से अब विशेष काउंसलिंग की संभावना पर विचार किया जा रहा है। यदि इस प्रक्रिया की अनुमति मिलती है, तो बीडीएस में प्रवेश लेने के इच्छुक अभ्यर्थियों को भी राहत मिल सकती है।

विशेष काउंसलिंग के लिए एमसीसी से मांगी गई अनुमति

खाली सीटों का मामला सामने आने के बाद एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने मेडिकल काउंसलिंग कमेटी को पत्र भेजा है। विश्वविद्यालय ने विशेष काउंसलिंग आयोजित करने की अनुमति के साथ इससे जुड़े दिशा-निर्देश भी मांगे हैं। अब इस मामले में अगला कदम एमसीसी के जवाब पर निर्भर करेगा। कमेटी की ओर से अनुमति मिलने और प्रक्रिया स्पष्ट होने के बाद ही विश्वविद्यालय आगे की कार्रवाई कर सकेगा। फिलहाल अभ्यर्थियों और संबंधित कॉलेजों को आधिकारिक फैसले का इंतजार है।

निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस भी बनी बड़ी वजह

निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस भी बनी बड़ी वजह
निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस भी बनी बड़ी वजह

प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्च भी दाखिले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन कॉलेजों में ट्यूशन फीस करीब 24 लाख रुपये सालाना है। इसके अतिरिक्त छात्रों को हॉस्टल, मेस और अन्य सुविधाओं के लिए भी अलग से भुगतान करना पड़ता है। इस तरह मेडिकल की पढ़ाई का कुल खर्च काफी बढ़ जाता है। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इतनी अधिक फीस और अन्य खर्च उठाना आसान नहीं होता। ऐसे में योग्य होने के बावजूद कई अभ्यर्थियों के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

विशेष काउंसलिंग से अभ्यर्थियों को मौका

विशेष काउंसलिंग से अभ्यर्थियों को मौका
विशेष काउंसलिंग से अभ्यर्थियों को मौका

दाखिले की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी एमबीबीएस और बीडीएस की सीटें खाली रहना कई सवाल खड़े करता है। वहीं, विशेष काउंसलिंग की अनुमति मिलने पर इन सीटों को भरने का एक और अवसर उपलब्ध हो सकता है। इससे उन अभ्यर्थियों को फायदा मिलने की संभावना है, जो नीट यूजी में सफल होने के बावजूद अब तक मेडिकल या डेंटल कॉलेज में प्रवेश नहीं ले पाए हैं। हालांकि, काउंसलिंग की तारीख, पात्रता और सीट आवंटन से संबंधित जानकारी अभी सामने नहीं आई है। फिलहाल सभी की निगाहें एमसीसी के जवाब पर टिकी हैं। अनुमति मिलने के बाद ही स्पष्ट होगा कि उत्तराखंड में खाली सीटों को भरने के लिए आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

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