Uttarakhand Flood: उत्तराखंड के चमोली जिले में सोमवार शाम अचानक आई फ्लैश फ्लड ने भारी नुकसान पहुंचाया। तेज बहाव के कारण तमक नाले पर बना बेली ब्रिज पानी में बह गया। यह पुल मलारी-नीती हाईवे पर स्थित था और जोशीमठ को नीती घाटी तथा सीमावर्ती इलाकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद करीब एक दर्जन गांवों और सीमा क्षेत्र का सड़क संपर्क प्रभावित हो गया है। अचानक आई बाढ़ के बाद प्रशासन ने पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी है।
जोशीमठ और सीमा क्षेत्र का संपर्क हुआ प्रभावित
चमोली के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनके जोशी के अनुसार, ज्योतिर्मठ यानी जोशीमठ से सीमांत क्षेत्र को जोड़ने वाले मलारी-नीती राष्ट्रीय राजमार्ग पर बना बेली ब्रिज तमक नाले के तेज बहाव में बह गया। इस मार्ग से नीती घाटी के कई गांवों और सीमावर्ती इलाकों तक आवागमन होता है। पुल के बह जाने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ सीमा क्षेत्र में आवाजाही भी प्रभावित हुई है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने में जुटी हैं।
बीआरओ ने शुरू किया वैकल्पिक मार्ग तैयार करने का काम
पुल के बहने के बाद सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ ने वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो एक-दो दिन के भीतर आवागमन के लिए अस्थायी व्यवस्था तैयार की जा सकती है। प्रशासन का प्रयास है कि जरूरी सेवाओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही ज्यादा समय तक बाधित न रहे। हालांकि, मौसम और नाले में जलस्तर की स्थिति को देखते हुए काम में चुनौतियां बनी हुई हैं।
बाढ़ में बीआरओ का चालक लापता
तमक नाले में अचानक बढ़े जलप्रवाह के दौरान बीआरओ का एक वाहन चालक भी लापता हो गया। अधिकारियों के मुताबिक, चालक बाढ़ की स्थिति का जायजा ले रहा था, तभी अचानक पुल तेज बहाव की चपेट में आ गया। इसी दौरान वह भी पानी के तेज प्रवाह में बह गया। लापता चालक की पहचान पंकज के रूप में बताई गई है, जो पिथौरागढ़ जिले का रहने वाला बताया जा रहा है। उसकी तलाश के लिए राहत और बचाव दलों को लगाया गया है।
वाहन के भी बहने की सूचना
अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ के तेज बहाव में एक वाहन के बह जाने की भी सूचना मिली है। घटना के बाद मौके पर मौजूद प्रशासनिक टीमों ने स्थिति का जायजा लिया। राहत और बचाव दल लापता चालक की तलाश के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्र में किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की संभावना को भी देख रहे हैं। लगातार खराब मौसम और तेज जलप्रवाह के कारण बचाव अभियान में सावधानी बरती जा रही है।
मलारी की ओर वाहनों की आवाजाही रोकी गई
सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने मलारी की तरफ से वाहनों की आवाजाही रोक दी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सड़क और नाले की स्थिति का पूरी तरह आकलन नहीं हो जाता, तब तक लोगों को जोखिम वाले मार्ग पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासनिक दल घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। लोगों को भी नदी और नालों के आसपास अनावश्यक आवाजाही नहीं करने की सलाह दी गई है।
अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने का खतरा
तमक नाले में अचानक बढ़े पानी के कारण अलकनंदा नदी के जलस्तर पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मुनादी कर लोगों को संभावित खतरे के प्रति जागरूक किया। लोगों से नदी, नालों और बरसाती धाराओं से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को दिए निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तमक नाले में आई अचानक बाढ़ का तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेजी से संचालित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने खासतौर पर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में एहतियाती कदम उठाने को कहा।
गांवों में राशन और दवाओं की आपूर्ति पर जोर
पुल के बह जाने से आसपास के गांवों में जरूरी सामान पहुंचाने में परेशानी हो सकती है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क संपर्क बाधित होने के बावजूद प्रभावित गांवों में राशन, खाद्य सामग्री, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक माध्यमों से सामान पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
उत्तराखंड के 12 जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा
इसी बीच मौसम विज्ञान विभाग के हाइड्रोमेट डिवीजन स्थित फ्लैश फ्लड गाइडेंस सेल ने उत्तराखंड के लिए अचानक बाढ़ के खतरे का अलर्ट जारी किया है। मंगलवार 11 अगस्त की शाम साढ़े पांच बजे तक राज्य के 12 जिलों में कुछ जलग्रहण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में कम से मध्यम स्तर की फ्लैश फ्लड का जोखिम बताया गया है। अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पौड़ी गढ़वाल इस अलर्ट में शामिल हैं।
खराब मौसम में यात्रा से बचने की अपील
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि मौसम विभाग और अन्य तकनीकी संस्थानों से प्राप्त पूर्व चेतावनियों के आधार पर राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह अलर्ट है। उन्होंने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से खराब मौसम या लगातार बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि नदी, नाले, गदेरे और बरसाती जलधाराओं के पास जाना खतरनाक हो सकता है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए।
पहले भी बाढ़ से बाधित होता रहा है तमक नाला
अधिकारियों के मुताबिक तमक नाले में बाढ़ आने की घटना नई नहीं है। पिछले कई वर्षों के दौरान भारी बारिश और लैंडस्लाइड के कारण जोशीमठ-नीती मोटर मार्ग कई बार बाधित हो चुका है। तमक नाले से आने वाला मलबा आसपास के क्षेत्रों के साथ धौलीगंगा नदी में भी मुश्किलें पैदा करता रहा है। कुछ साल पहले नाले पर बना पक्का पुल भी बाढ़ की चपेट में आ गया था, जिसके बाद बीआरओ ने लोगों की आवाजाही के लिए बेली ब्रिज तैयार किया था।
जुम्मा और नीती समेत 12 गांव प्रभावित
बेली ब्रिज के बह जाने से जुम्मा, नीती समेत करीब 12 गांवों और सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है। यह इलाका रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में सड़क संपर्क जल्द बहाल करना प्रशासन और बीआरओ के लिए प्राथमिकता है। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने का काम जारी है और प्रशासन की टीमें प्रभावित इलाकों में हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
राहत और बचाव टीमों ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिवादन बल यानी SDRF और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF की टीमें सक्रिय कर दी गईं। राहत और बचाव दल लापता चालक की तलाश के साथ प्रभावित इलाकों की स्थिति का आकलन कर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और अधिकारियों द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। मौसम की स्थिति सामान्य होने और वैकल्पिक मार्ग तैयार होने के बाद ही प्रभावित क्षेत्र में आवागमन पूरी तरह बहाल होने की उम्मीद है।
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