Uttarakhand Earthquake: उत्तरकाशी में भूकंप के झटके, फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में सोमवार को 4.2 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे था।

Uttarakhand Earthquake

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 10, 2026

Uttarakhand Earthquake: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में एक बार फिर धरती डोलने से लोगों में दहशत का माहौल बन गया। राज्य के उत्तरकाशी जिले में सोमवार देर रात भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिससे सोते हुए लोग अचानक घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। राहत की बात यह है कि इस प्राकृतिक आपदा में फिलहाल किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने इस भूकंप की पुष्टि करते हुए इसकी तीव्रता 4.2 मापी है।

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उत्तरकाशी में महसूस किए गए तेज झटके

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तरकाशी जिले में भूकंप का मुख्य झटका सोमवार देर रात करीब 1 बजकर 21 मिनट पर आया। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 4.2 दर्ज की गई। भूकंप विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। भौगोलिक स्थिति के लिहाज से यह केंद्र बड़कोट तहसील मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले राजगढ़ी क्षेत्र के आसपास बताया गया है। रात के सन्नाटे में अचानक धरती के हिलने से क्षेत्र के लोगों में भारी खलबली मच गई।

यमुना और गंगा घाटी में फैली दहशत

भूकंप का झटका इतना तेज था कि उत्तरकाशी की प्रसिद्ध यमुना घाटी और गंगा घाटी से जुड़े कई इलाकों में लोग गहरी नींद से जाग गए और अपनी जान बचाने के लिए तुरंत घरों से बाहर खुले आसमान के नीचे भागे। अचानक आए इस भूकम्प के कारण लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोगों ने तुरंत अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों को फोन करके उनका हाल-चाल जाना। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र ने भी घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और फिलहाल सब कुछ नियंत्रण में है।

टिहरी गढ़वाल में भी कांपी धरती

उत्तरकाशी के अलावा उत्तराखंड के एक अन्य पर्वतीय जिले टिहरी गढ़वाल में भी भूकंप के हल्के झटके दर्ज किए गए। टिहरी के कीर्तिनगर और घनसाली क्षेत्रों में तड़के यह कंपन महसूस हुआ। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, टिहरी में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर मात्र 2.0 दर्ज की गई, जिसकी गहराई जमीन से करीब पांच किलोमीटर नीचे थी। तीव्रता कम होने के कारण यहां ज्यादातर लोगों को इसका अहसास नहीं हुआ, लेकिन वैज्ञानिक उपकरणों ने इसे रिकॉर्ड किया।

प्रशासन की पैनी नजर, किसी नुकसान की खबर नहीं

घटना के तुरंत बाद राज्य के आपदा प्रबंधन विभागों और स्थानीय प्रशासन ने दोनों जिलों (उत्तरकाशी और टिहरी) के प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का जायजा लेने के लिए संपर्क साधा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलहाल किसी भी स्थान से मकानों को नुकसान पहुंचने, भूस्खलन होने या किसी व्यक्ति के घायल होने या हताहत होने की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

प्रशासन ने पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं के समय धैर्य बनाए रखें और सुरक्षा के तय मानकों का पालन करें। उत्तराखंड भौगोलिक दृष्टि से भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील (सिस्मिक जोन) माना जाता है, इसलिए इस प्रकार के झटके आने पर सतर्क रहना बेहद आवश्यक है।

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