Uttarakhand News: उत्तराखंड के चकराता ब्लॉक के उदावा गांव से जुड़ा एक मामला सड़क सुविधा की कमी को उजागर कर रहा है। यहां शादी के बाद दुल्हन शर्मिला को अपने ससुराल तक पहुंचने के लिए करीब 18 किलोमीटर का पहाड़ी रास्ता पैदल तय करना पड़ा। खास बात यह रही कि शर्मिला ने यह सफर अपने भारी शादी के लहंगे में पूरा किया। रास्ते में समय पर पहुंचने की जल्दबाजी भी थी, क्योंकि ससुराल में गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त निकलने का डर था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गांव तक सड़क न पहुंचने का मुद्दा चर्चा में आ गया है।
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बुल्हाड़ से लोखंडी तक गाड़ियों से पहुंचा काफिला
जानकारी के मुताबिक, शर्मिला की शादी उदावा गांव के अनिल चौहान से हुई थी। शादी के बाद विदाई की रस्म पूरी होने पर दुल्हन गाड़ियों के काफिले के साथ बुल्हाड़ गांव से लोखंडी तक पहुंची। यहां तक यात्रा वाहन से हो सकी, लेकिन इसके आगे ससुराल तक जाने के लिए सड़क की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में दुल्हन और उसके साथ मौजूद लोगों के सामने पहाड़ी रास्ते पर पैदल चलने के अलावा कोई आसान विकल्प नहीं बचा। शादी जैसे खास मौके पर शर्मिला को जिस परेशानी का सामना करना पड़ा, उसने गांव में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए।
भारी लहंगे में चार घंटे तक पैदल चलती रही दुल्हन
रिपोर्ट के अनुसार, शर्मिला ने करीब चार घंटे में 18 किलोमीटर का सफर पैदल पूरा किया। शादी का भारी लहंगा पहनकर पहाड़ी रास्ते पर चलना अपने आप में मुश्किल था। इसके बावजूद गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त न छूटे, इस वजह से दुल्हन तेजी से आगे बढ़ती दिखाई दी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में वह कठिन रास्ते पर जल्द से जल्द ससुराल पहुंचने की कोशिश करती नजर आती है। आमतौर पर शादी के बाद दुल्हन को गाड़ी से ससुराल तक पहुंचाया जाता है, लेकिन सड़क न होने की वजह से शर्मिला को इस परंपरागत अनुभव से बिल्कुल अलग परिस्थिति का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री धामी से सड़क बनवाने की अपील

इस घटना के वायरल वीडियो में दुल्हन शर्मिला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उदावा गांव तक सड़क बनवाने की मांग करती नजर आती हैं। उनका संदेश गांव के लोगों की उस परेशानी को सामने लाता है, जिसका सामना उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में करना पड़ सकता है। सड़क की कमी केवल शादी-ब्याह जैसे अवसरों पर ही मुश्किल नहीं बढ़ाती, बल्कि जरूरत पड़ने पर अस्पताल पहुंचने, जरूरी सामान लाने और दूसरे स्थानों तक आने-जाने में भी परेशानी खड़ी कर सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में गांव के लिए सड़क निर्माण की किसी नई मंजूरी या समयसीमा का उल्लेख नहीं है।
आजादी के दशकों बाद भी सड़क का इंतजार
उदावा गांव का यह मामला पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क की अहमियत को फिर सामने लाता है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों में सड़क का अभाव लोगों की आवाजाही को कठिन बना सकता है। ग्रामीणों के लिए सड़क केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों तक पहुंचने का जरिया भी होती है। शर्मिला की शादी के दौरान सामने आई परेशानी ने इस मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि गांव तक सड़क पहुंचाने की मांग पर प्रशासन और सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
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