
Uttarakhand News: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर चुनाव आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को बेहतर सुविधाएं देने के साथ महिला सशक्तीकरण और दिव्यांगजनों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जाएगा। चुनाव आयोग ने इसके लिए खास योजना तैयार की है। इसके तहत प्रदेश में महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही मॉडल पोलिंग स्टेशन और दिव्यांग कर्मचारियों के संचालन वाले विशेष बूथ भी बनाए जाएंगे। चुनाव के दौरान बुजुर्गों, दिव्यांगों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले मतदाताओं की सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाएगा।
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2027 के विधानसभा चुनाव में 130 महिला बूथ
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में इस बार महिला सशक्तीकरण की तस्वीर पहले से अधिक मजबूत दिखाई देगी। चुनाव आयोग की योजना के अनुसार प्रदेश में 130 मतदान केंद्रों की जिम्मेदारी महिलाओं को सौंपने की तैयारी है। इन बूथों पर मतदान से जुड़ी व्यवस्थाओं का संचालन महिला कर्मचारी करेंगी। इससे चुनाव प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के साथ उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने का अवसर भी मिलेगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में 79 ऐसे मतदान केंद्र थे, जिनका संचालन पूरी तरह महिलाओं ने किया था। आगामी 2027 के चुनाव में इनकी संख्या बढ़ाकर 137 करने का प्रस्ताव है। हालांकि खबर में शुरुआती आंकड़े के रूप में 130 बूथों का उल्लेख किया गया है। इस योजना का उद्देश्य महिला कर्मचारियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
मतदाताओं के लिए बनेंगे 92 मॉडल पोलिंग स्टेशन
चुनाव आयोग ने मतदान के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश में 92 मॉडल पोलिंग स्टेशन बनाने की योजना तैयार की है। इन मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को सुविधाजनक और व्यवस्थित माहौल उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। मॉडल बूथों के माध्यम से मतदान प्रक्रिया को अधिक सुगम और आकर्षक बनाने का प्रयास किया जाएगा।
इसके अलावा दिव्यांग कर्मचारियों द्वारा संचालित 66 विशेष मतदान केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। इन बूथों के जरिए दिव्यांगजनों की क्षमता और भागीदारी को चुनावी प्रक्रिया में विशेष स्थान दिया जाएगा। आयोग की कोशिश है कि मतदान व्यवस्था में हर वर्ग को प्रतिनिधित्व और सुविधाएं मिलें।
प्रदेश में कुल 12,543 मतदान केंद्रों पर होगा मतदान
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उत्तराखंड में कुल 12,543 पोलिंग स्टेशन निर्धारित किए गए हैं। इनमें कुछ मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां पहुंचना चुनाव कर्मचारियों के लिए बड़ी चुनौती होगा। प्रदेश के तीन बूथ ऐसे हैं, जहां पहुंचने के लिए 20 किलोमीटर से अधिक पैदल दूरी तय करनी पड़ेगी। इनमें उत्तरकाशी के दो और चमोली जिले का एक मतदान केंद्र शामिल है।
इसके अलावा आठ मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां पहुंचने के लिए 10 से 15 किलोमीटर तक पैदल चलना होगा। वहीं, 23 बूथों तक पहुंचने के लिए आठ से 10 किलोमीटर की पहाड़ी चढ़ाई करनी पड़ेगी। इन दुर्गम परिस्थितियों को देखते हुए आयोग ने मतदान कर्मचारियों की रवानगी का विशेष कार्यक्रम तैयार किया है।
दुर्गम क्षेत्रों के लिए तीन दिन पहले रवाना होंगी पोलिंग पार्टियां
पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों में स्थित मतदान केंद्रों तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने पहले से व्यवस्थाएं बनाई हैं। योजना के अनुसार 12 पोलिंग पार्टियों को मतदान से तीन दिन पहले ही रवाना कर दिया जाएगा। वहीं, 665 पोलिंग पार्टियां दो दिन पहले अपने निर्धारित मतदान केंद्रों के लिए रवाना होंगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य खराब भौगोलिक परिस्थितियों, लंबी पैदल दूरी और मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद मतदान प्रक्रिया को समय पर शुरू कराना है। खासकर उत्तरकाशी और चमोली जैसे पर्वतीय जिलों में इन व्यवस्थाओं की अहम भूमिका रहेगी।
100 साल से अधिक उम्र के इतने मतदाता
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार एक जुलाई 2026 तक प्रदेश में 100 वर्ष से अधिक आयु के 910 मतदाता पंजीकृत थे। वहीं, 85 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ मतदाताओं की संख्या 48,558 दर्ज की गई है। इन बुजुर्ग मतदाताओं की सुविधा के लिए भी चुनावी व्यवस्था में विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी। प्रदेश में कुल 76,216 दिव्यांग मतदाता पंजीकृत हैं। इसके अलावा 212 थर्ड जेंडर मतदाता भी मतदाता सूची में शामिल हैं। इन सभी वर्गों की मतदान में भागीदारी सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की प्राथमिकताओं में शामिल है।
बुक्सा जनजाति के मतदाताओं पर भी विशेष ध्यान
उत्तराखंड में वनराजि और बुक्सा जनजाति के पात्र मतदाताओं का पंजीकरण भी चुनाव आयोग के लिए महत्वपूर्ण विषय है। आंकड़ों के मुताबिक इन दोनों जनजातियों के 18 वर्ष से अधिक आयु वाले कुल 25,676 पात्र नागरिक हैं। इनमें से 13,053 लोगों का मतदाता के रूप में पंजीकरण पूरा किया जा चुका है। आगामी चुनाव को देखते हुए शेष पात्र नागरिकों को भी मतदाता सूची से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। कुल मिलाकर उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 में महिला भागीदारी, दिव्यांग सुविधाओं, बुजुर्ग मतदाताओं और दुर्गम क्षेत्रों की मतदान व्यवस्था पर विशेष फोकस रहने वाला है।











