US-Iran War 2026: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से वापसी की राहें धुंधली नजर आ रही हैं। शुक्रवार, 3 मार्च 2026 को इस भीषण युद्ध का 35वां दिन है, लेकिन शांति की कोई भी किरण फिलहाल दिखाई नहीं दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक नीतियों और ईरान के सख्त रुख ने मध्य पूर्व (Middle East) में अस्थिरता का माहौल पैदा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात से चिंतित है कि यदि यह संघर्ष और लंबा खिंचा, तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।
जवाद जरीफ की कूटनीतिक सलाह: ‘विजेता बनकर करें सीजफायर‘
इस बीच, ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जवाद जरीफ का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जरीफ ने अपनी सरकार को सुझाव दिया है कि तेहरान को अब खुद को ‘विजेता’ घोषित करते हुए युद्ध विराम (सीजफायर) कर देना चाहिए। उनका मानना है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप इस जंग को रोकने में असमर्थ या अनिच्छुक दिख रहे हैं, तो ईरान को स्वयं पहल करनी चाहिए। जरीफ ने तेहरान को सलाह दी है कि उसे अमेरिका के साथ एक ठोस ‘डील’ करनी चाहिए, जिससे न केवल वर्तमान हिंसा रुके, बल्कि भविष्य में भी देश की सुरक्षा और हितों को कोई खतरा न हो।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज: प्रतिबंध हटवाने के लिए सौदेबाजी का हथियार
युद्ध के कारण ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर आवाजाही रोक दी है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार पर बड़ा असर पड़ा है। जवाद जरीफ ने इसे एक रणनीतिक अवसर के रूप में देखते हुए कहा कि तेहरान को हॉर्मुज को फिर से खोलने का प्रस्ताव अमेरिका के सामने रखना चाहिए। इसके बदले में ईरान को अपने ऊपर लगे सभी कड़े आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटवाने की मांग करनी चाहिए। जरीफ का तर्क है कि इस तरह की ‘गिव एंड टेक’ पॉलिसी ईरान को आर्थिक संकट से उबारने और युद्ध के दलदल से बाहर निकालने का सबसे प्रभावी रास्ता हो सकती है।
ट्रंप का खतरनाक प्लान: ग्राउंड ऑपरेशन और यूरेनियम पर नजर
दूसरी ओर, वाशिंगटन से आ रही खबरें काफी चिंताजनक हैं। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ ग्राउंड ऑपरेशन (जमीनी सैन्य कार्रवाई) की तैयारी कर रहे हैं। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु ठिकानों तक पहुंचकर वहां से यूरेनियम हासिल करना है। ट्रंप ने सैन्य अधिकारियों से इस संबंध में एक विस्तृत ब्लूप्रिंट मांगा था, जो अब पेश कर दिया गया है। इस मिशन के लिए हजारों जांबाज कमांडो की आवश्यकता होगी और यह ऑपरेशन केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिकी सेना को ईरानी जमीन पर उतरना होगा।
मिशन की चुनौतियां: एयरस्ट्रिप निर्माण और हफ्तों का वक्त
इस जमीनी कार्रवाई को अंजाम देना अमेरिका के लिए भी आसान नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन पर उतरकर एयरस्ट्रिप बनाना, भारी सैन्य उपकरणों को पहुंचाना और फिर जमीन के नीचे सुरक्षित छिपे यूरेनियम को बाहर निकालना एक बेहद पेचीदा कार्य है। इस पूरे ऑपरेशन को पूरा करने में कई हफ्ते लग सकते हैं और इसमें दोनों ओर से भारी जान-माल के नुकसान की आशंका है। ट्रंप के इस संभावित कदम ने ईरान को और अधिक आक्रामक बना दिया है, जिससे यह युद्ध अब सीधे टकराव की ओर बढ़ता दिख रहा है। वर्तमान में ईरान जंग रोकने के बजाय अपनी रक्षात्मक पंक्तियों को मजबूत करने में जुटा है।
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