US Senate Defense Bill : ईरान तनाव के बीच ट्रंप को झटका, अमेरिकी सीनेट में डिफेंस बिल अटका

ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सीनेट में डिफेंस बिल का अटकना राष्ट्रपति ट्रंप के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है। रक्षा बजट और सैन्य रणनीति को लेकर बढ़ी खींचतान के बीच अब सवाल उठ रहे हैं कि अमेरिका की आगे की नीति क्या होगी और इसका वैश्विक सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा।

US Senate Defense Bill

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 15, 2026

US Senate Defense Bill : ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेट्स ने ट्रंप सरकार द्वारा लाए गए 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 96 लाख करोड़ रुपये) के विशाल डिफेंस बिल को पारित होने से रोक दिया है। इस ‘नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट’ के तहत पेंटागन के खर्चों में भारी वृद्धि और सैन्य जवानों के वेतन में बढ़ोतरी का प्रावधान था। हालांकि, ईरान के खिलाफ चल रही जंग के विरोध में डेमोक्रेट्स ने इस बिल को समर्थन देने से साफ इनकार कर दिया, जिससे सरकार की रक्षा योजनाओं को तगड़ा धक्का लगा है।

50-46 के अंतर से खारिज हुआ सालाना डिफेंस बिल

सीनेट में इस बिल पर हुई वोटिंग का परिणाम 50-46 रहा, जिससे यह आवश्यक बहुमत हासिल करने में विफल रहा। डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान के साथ जारी युद्ध समाप्त नहीं होता और उसकी स्पष्ट रणनीति सामने नहीं आती, तब तक विपक्षी दल किसी भी नए रक्षा पैकेज को आगे नहीं बढ़ने देंगे। यह वोटिंग पार्टी लाइन के आधार पर हुई, जिसमें डेमोक्रेट्स ने एकजुट होकर ट्रंप सरकार की सैन्य नीतियों के प्रति अपना असंतोष व्यक्त किया। यह घटना दर्शाती है कि ईरान के साथ जारी पांचवें महीने के संघर्ष ने अमेरिकी राजनीति में भारी विभाजन पैदा कर दिया है।

चक शूमर की चेतावनी: ‘जंग में नहीं धकेल सकते’

बिल के विरोध में बोलते हुए चक शूमर ने राष्ट्रपति ट्रंप पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति अमेरिकी जनता को ऐसी जंग में और गहराई तक नहीं धकेल सकते, जिसका न तो कोई स्पष्ट उद्देश्य है और न ही जिसे खत्म करने का उनके पास कोई तरीका है। शूमर ने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह प्रशासन की गलत नीतियों के आगे झुकने के बजाय अपनी जवाबदेही तय करे। उनका मानना है कि बिना ठोस रणनीति के सेना पर खरबों डॉलर का अतिरिक्त खर्च करना जनता के हित में नहीं है और कांग्रेस को इस पर चुप्पी साधे रहने के बजाय सवाल पूछने चाहिए।

मिड-टर्म इलेक्शन पर मंडराया संकट का साया

यह राजनीतिक उथल-पुथल ऐसे समय में हुई है जब व्हाइट हाउस ने औपचारिक रूप से ईरान के खिलाफ बमबारी दोबारा शुरू करने की घोषणा की है। इससे अमेरिका और ईरान के बीच मौजूद अस्थायी सीजफायर पूरी तरह खत्म हो गया है। इस सैन्य कार्रवाई का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। आर्थिक उथल-पुथल और गैस की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव ने आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आने वाले मिड-टर्म इलेक्शन से ठीक पहले, ईरान के साथ छिड़ी यह नई जंग और घरेलू राजनीति में जारी गतिरोध ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार की सैन्य महत्वाकांक्षाएं अब चुनावी नफा-नुकसान के केंद्र में आ गई हैं।

Read More :  UP Crime : यूपी पेट्रोल पंप विवाद में कुल्हाड़ी हमला, युवक के दोनों हाथ काटे, मचा हड़कंप