US sanctions China Companies: ईरान को मदद देने के आरोप में चीनी कंपनियों पर अमेरिका का प्रतिबंध

ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के बाद अमेरिका ने ईरान को मदद पहुंचाने के आरोप में तीन चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिका ने इसे सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।

US sanctions China companies

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 12, 2026

US sanctions China Companies: अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए तीन चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। यह कार्रवाई 8 मई को की गई, जिसमें इन कंपनियों पर ईरान को सैटेलाइट इमेजरी उपलब्ध कराने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि इन तस्वीरों का उपयोग मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उसके सहयोगियों पर हमलों की योजना बनाने में किया गया।

यह पूरा मामला ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के दौरान सामने आई गतिविधियों से जुड़ा बताया जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट कहा है कि इस तरह की गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं और इनका जवाब कड़े कदमों से दिया जाएगा।

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किन चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंध

अमेरिका द्वारा जिन तीन चीनी कंपनियों को प्रतिबंधित किया गया है, उनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं— पहली कंपनी मीएन्ट्रॉपी टेक्नोलॉजी कंपनी (जिसे मिजारविजन के नाम से भी जाना जाता है), जो हांगझोउ में स्थित है। अमेरिका का आरोप है कि इस कंपनी ने ओपन-सोर्स सैटेलाइट इमेजरी जारी की, जिसमें अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी शामिल थी। दूसरी कंपनी ‘द अर्थ आई’ (The Earth Eye) बीजिंग स्थित है। इस पर आरोप है कि इसने सीधे ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराईं, जिनका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए किया गया।

तीसरी कंपनी चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी कंपनी है, जिस पर आरोप है कि इसने ईरान के अनुरोध पर अमेरिकी और सहयोगी सैन्य ठिकानों की निगरानी से जुड़ी सैटेलाइट इमेजरी जुटाई।

पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप

अमेरिका ने यह भी बताया कि चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी कंपनी पर पहले भी प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। उस समय आरोप था कि कंपनी ने यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए सैटेलाइट डेटा उपलब्ध कराया था। इससे साफ है कि यह कंपनियां पहले भी विवादों में रही हैं और उनकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी।

ईरान के रक्षा नेटवर्क पर भी कार्रवाई

इस कार्रवाई के तहत केवल चीनी कंपनियां ही नहीं, बल्कि ईरान से जुड़े रक्षा नेटवर्क पर भी शिकंजा कसा गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान के रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बल लॉजिस्टिक्स मंत्रालय की निर्यात शाखा ‘मिनडेक्स’ पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि ऐसे नेटवर्क ईरान के सैन्य और परमाणु कार्यक्रमों को मजबूत करने में मदद करते हैं, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है।

ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रमों पर भी नजर

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इस मामले में और सख्ती दिखाते हुए 10 संस्थाओं और व्यक्तियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। इन पर आरोप है कि ये ईरान को हथियार, तकनीक और कच्चा माल उपलब्ध करा रहे थे, जिसका उपयोग ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों में किया जा रहा था। इनमें चीन, ईरान, बेलारूस और संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े व्यक्ति और कंपनियां शामिल हैं।

अमेरिका की आगे भी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

अमेरिकी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि वह ईरान के सैन्य नेटवर्क को समर्थन देने वाली सभी विदेशी संस्थाओं पर लगातार कार्रवाई जारी रखेगा। ट्रेजरी विभाग ने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ऐसे खरीद नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना है, जो ईरान के हथियार कार्यक्रमों को मजबूत कर रहे हैं। इसके साथ ही अमेरिका ने यह भी कहा कि ये कदम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप हैं और ईरान पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को और मजबूत करने की दिशा में उठाए गए हैं।

वैश्विक स्तर पर बढ़ा तनाव

इस कार्रवाई के बाद अमेरिका, चीन और ईरान के बीच तनाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सैटेलाइट तकनीक और सैन्य डेटा को लेकर यह विवाद आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकता है।

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