US Russia Tariff: रूस से तेल खरीदने वाले सावधान! US Senate से 100% टैरिफ वाला बिल पास, भारत पर कितना असर?

अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाले नए प्रतिबंध बिल को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव में रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का विकल्प है। भारत भी रूसी तेल का बड़ा खरीदार है। ऐसे में सवाल है, नई दिल्ली पर इसका कितना असर पड़ेगा?

US Senate से 100% टैरिफ वाला बिल पास

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 8, 2026

US Russia Tariff: अमेरिका और रूस के बीच चल रहे तनाव के बीच वॉशिंगटन ने मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ को भारी द्विदलीय समर्थन के साथ मंजूरी दे दी। बिल के पक्ष में 86 और विरोध में 11 वोट पड़े। अब इसे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भेजा जाएगा।

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रूस की ऊर्जा खरीद पर शिकंजा कसने की तैयारी

इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली आय पर दबाव डालना है। बिल के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो बड़ी मात्रा में रूसी तेल और गैस खरीदते हैं। अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूसी ऊर्जा की बिक्री से मिलने वाला राजस्व मॉस्को को यूक्रेन युद्ध के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराता है। इसलिए कानून का फोकस केवल रूस पर सीधे प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके बड़े ऊर्जा खरीदारों पर भी दबाव बनाने का प्रयास किया गया है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बिल?

भारत लंबे समय से रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। खासकर यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूसी तेल की खरीद भारत की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी है। इसी वजह से प्रस्तावित अमेरिकी कानून के संभावित असर को लेकर नई दिल्ली पर भी नजर है। हालांकि, यह कहना अभी सही नहीं होगा कि बिल पास होते ही भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लग जाएगा। मौजूदा प्रस्ताव राष्ट्रपति को कार्रवाई करने की शक्ति देता है, लेकिन इसे लागू करना स्वतः अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा बिल को प्रतिनिधि सभा से भी मंजूरी मिलनी बाकी है।

राष्ट्रपति के पास रहेंगे कई विकल्प

प्रस्तावित व्यवस्था में अमेरिकी राष्ट्रपति को इन व्यापारिक दंडात्मक उपायों के संबंध में काफी अधिकार दिए गए हैं। राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति कुछ मामलों में कार्रवाई को टालने, बदलने या उससे छूट देने जैसे विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। यही वजह है कि भारत पर संभावित प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कानून अंतिम रूप में कैसा बनता है और अमेरिकी प्रशासन इसे किस तरह लागू करने का फैसला करता है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ सकता है असर

अगर भविष्य में भारत के खिलाफ अतिरिक्त टैरिफ लागू किए जाते हैं, तो इसका असर दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर पड़ सकता है। अमेरिका को भारत से इंजीनियरिंग उत्पाद, दवाएं, रसायन, कपड़ा और ऑटो पार्ट्स समेत कई तरह का सामान निर्यात किया जाता है। हालांकि, भारत और अमेरिका के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश रक्षा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग भी करते हैं। चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच यह साझेदारी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

अब आगे क्या होगा?

सीनेट की मंजूरी के बाद अगली बड़ी परीक्षा अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में होगी। बिल वहां पारित होने के बाद ही राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए पहुंच सकता है। इसलिए फिलहाल भारत समेत रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों के लिए स्थिति संभावित जोखिम की है, न कि तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होने की। आने वाले दिनों में अमेरिकी संसद और प्रशासन का रुख इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।