US Job Market Crisis: दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, अमेरिका, इस समय एक गंभीर आर्थिक संकट के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है। श्रम विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए ताजा आंकड़ों ने विशेषज्ञों और आम जनता दोनों को चौंका दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने अमेरिकी कंपनियों ने अप्रत्याशित रूप से 92,000 नौकरियों की कटौती की है। यह गिरावट इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अमेरिकी श्रम बाजार जबरदस्त दबाव में है। इसके साथ ही, देश में बेरोजगारी की दर मामूली रूप से बढ़कर 4.4 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है।
फरवरी के आंकड़े उम्मीद से विपरीत: नियुक्तियों की रफ्तार में आई भारी कमी
श्रम विभाग की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि फरवरी माह में नियुक्तियों की स्थिति जनवरी के मुकाबले काफी निराशाजनक रही। जहाँ जनवरी में कंपनियों, गैर-लाभकारी संस्थाओं और सरकारी एजेंसियों ने मिलकर 1,26,000 नई नौकरियां जोड़ी थीं, वहीं फरवरी में यह ग्राफ पूरी तरह नीचे गिर गया। अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया था कि फरवरी में कम से कम 60,000 नई नौकरियां पैदा होंगी, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट रही। संशोधित आंकड़ों से यह भी पता चला है कि दिसंबर और जनवरी के पेरोल से भी 69,000 नौकरियों को कम कर दिया गया है, जो आर्थिक सुस्ती की गहराई को दर्शाता है।
ईरान युद्ध का आर्थिक प्रभाव: तेल की कीमतों और अनिश्चितता का बोझ
रोजगार बाजार में आई इस अचानक गिरावट का सबसे बड़ा कारण ईरान के साथ जारी युद्ध को माना जा रहा है। भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिसका सीधा असर अमेरिकी व्यवसायों पर पड़ा है। युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ गई है। नेवी फेडरल क्रेडिट यूनियन की मुख्य अर्थशास्त्री हेदर लॉन्ग का मानना है कि कंपनियां इस वसंत ऋतु में नई भर्तियाँ करने से हिचकिचा रही हैं। जब तक युद्ध समाप्त नहीं होता, तब तक व्यवसायों और उपभोक्ताओं पर यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ बना रहेगा।
ट्रंप की नीतियां और उच्च ब्याज दरें: 2025 से जारी सुस्ती का सिलसिला
अमेरिकी रोजगार बाजार केवल वर्तमान युद्ध से ही प्रभावित नहीं है, बल्कि इसके पीछे पिछले साल की नीतियों का भी हाथ है। साल 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त शुल्क नीतियों (Tariff Policies) और फेडरल रिजर्व द्वारा लागू की गई उच्च ब्याज दरों के कारण बाजार पहले से ही सुस्त था। हालांकि, जनवरी 2026 के आंकड़ों ने सुधार की एक धुंधली उम्मीद जगाई थी, लेकिन फरवरी की इस रिपोर्ट ने उन सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। फिच रेटिंग्स के अर्थशास्त्री ओलू सोनोला के अनुसार, यह रिपोर्ट हर लिहाज से बुरी खबर है और यह श्रम बाजार की स्थिरता के दावों को पूरी तरह खारिज करती है।
फेडरल रिजर्व के सामने धर्मसंकट: मौद्रिक नीति के लिए सबसे कठिन समय
वर्तमान स्थिति ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक ‘फेडरल रिजर्व’ के लिए एक अत्यंत जटिल परिदृश्य पैदा कर दिया है। रेमंड जेम्स के मुख्य अर्थशास्त्री यूजीनियो अलेमान ने इसे “मौद्रिक नीति के लिए सबसे खराब स्थिति” करार दिया है। एक तरफ कम नियुक्तियों के कारण रोजगार बाजार को सहारा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती की जरूरत है, तो दूसरी तरफ युद्ध के कारण बढ़ती मुद्रास्फीति (Inflation) पर लगाम लगाने के लिए दरों को ऊंचा रखना अनिवार्य है। फेडरल रिजर्व अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां एक गलत फैसला अर्थव्यवस्था को मंदी की गहरी खाई में धकेल सकता है।
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