US Israel Relations: इजरायल-अमेरिका संबंधों में दरार, ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर नेतन्याहू ने जताया कड़ा ऐतराज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने गाजा के भविष्य के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' का गठन किया है, जिसमें तुर्की और कतर जैसे देशों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। नेतन्याहू ने इसे इजरायल की संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ बताते हुए खारिज कर दिया है। क्या यह विवाद मध्य पूर्व में नए युद्ध का कारण बनेगा?

US Israel Relations

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 18, 2026

US Israel Relations: एक अप्रत्याशित और असामान्य घटनाक्रम में इजरायल ने गाजा पट्टी के भविष्य को लेकर तैयार की गई अमेरिकी नीति पर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। दशकों से चले आ रहे मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के बीच, यह विवाद गाजा के लिए गठित अमेरिकी समर्थित ‘कार्यकारी बोर्ड’ की संरचना को लेकर पैदा हुआ है। इजरायली नेतृत्व का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण निर्णय को लेते समय इजरायल की सुरक्षा चिंताओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को नजरअंदाज किया है। सार्वजनिक रूप से अपने सबसे करीबी सहयोगी की आलोचना करना यह दर्शाता है कि गाजा के युद्ध-पश्चात प्रबंधन को लेकर दोनों देशों के दृष्टिकोण में बड़ी खाई पैदा हो गई है।

समन्वय की कमी का आरोप: नेतन्याहू कार्यालय ने जारी किया सख्त बयान

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने शनिवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर ट्रंप प्रशासन पर सीधा हमला बोला। बयान में कहा गया कि व्हाइट हाउस द्वारा इस सप्ताह की गई घोषणा पूरी तरह से एकतरफा थी और इसके लिए इजरायल के साथ कोई पूर्व समन्वय (Coordination) नहीं किया गया था। नेतन्याहू के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि बोर्ड की वर्तमान रूपरेखा इजरायल की आधिकारिक सरकारी नीति के विपरीत है। इस विवाद को सुलझाने के लिए इजरायली विदेश मंत्री गिडोन सार जल्द ही अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रूबियो के साथ बातचीत करेंगे, ताकि इजरायल के पक्ष को स्पष्टता के साथ रखा जा सके।

तुर्किए की भागीदारी पर विवाद: इजरायल की सबसे बड़ी आपत्ति

हालांकि इजरायल ने आधिकारिक तौर पर बोर्ड के सभी विवादास्पद बिंदुओं का खुलासा नहीं किया है, लेकिन रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विवाद की मुख्य जड़ तुर्किए (Turkey) की बोर्ड में मौजूदगी है। व्हाइट हाउस द्वारा घोषित समिति में तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान को शामिल किया गया है। इजरायल लंबे समय से गाजा की राजनीति या प्रशासन में तुर्किए की किसी भी भूमिका का कड़ा विरोध करता रहा है, क्योंकि तुर्किए का रुख हमास के प्रति नरम माना जाता रहा है। इजरायल को डर है कि तुर्किए की उपस्थिति से गाजा में उसके सुरक्षा हितों को नुकसान पहुंच सकता है।

बोर्ड की संरचना: कौन-कौन संभालेगा गाजा का अंतरिम कार्यभार?

अमेरिकी योजना के तहत गठित इस बोर्ड में कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय चेहरों को जगह दी गई है। इसमें संयुक्त राष्ट्र की मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया की विशेष समन्वयक सिग्रिड कॉग, एक इजरायली-साइप्रट उद्योगपति और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक वरिष्ठ मंत्री को शामिल किया गया है। यह समिति गाजा में एक अस्थायी और तकनीकी शासन की निगरानी करने के लिए बनाई गई है। यह ‘बोर्ड ऑफ पीस’ डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित युद्ध समाप्ति योजना के दूसरे चरण को लागू करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा, जिसका उद्देश्य युद्धग्रस्त क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना है।

ट्रंप की युद्ध समाप्ति योजना: कठिन दूसरे चरण में प्रवेश

वाशिंगटन ने हाल ही में घोषणा की थी कि गाजा के लिए अमेरिकी मसौदा संघर्ष विराम योजना अब अपने सबसे चुनौतीपूर्ण यानी दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है। इस चरण का मुख्य उद्देश्य एक ‘अंतरिम तकनीकी फलस्तीनी प्रशासन’ का गठन करना है, जो शासन व्यवस्था की बागडोर संभालेगा। इस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की कमान स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में होगी। इस हाई-प्रोफाइल टीम में विदेश मंत्री मार्को रूबियो, दिग्गज कारोबारी स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर शामिल हैं, जिन्होंने पहले भी ‘अब्राहम अकॉर्ड’ के जरिए मध्य पूर्व की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई है।

सहयोगियों के बीच बढ़ता तनाव: भविष्य की चुनौतियां

इजरायल द्वारा अमेरिका की सार्वजनिक आलोचना को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। आमतौर पर दोनों देश अपने मतभेदों को बंद कमरों में सुलझाने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार मामला सीधा गाजा के भविष्य और सुरक्षा गारंटी से जुड़ा है। यदि यह गतिरोध बना रहा, तो ट्रंप की ‘शांति योजना’ खटाई में पड़ सकती है। दुनिया की निगाहें अब मार्को रूबियो और गिडोन सार की होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि अमेरिका और इजरायल गाजा के प्रशासनिक ढांचे पर एकमत हो पाते हैं या नहीं।

Read More: China Population Crisis: जनसंख्या बढ़ाने की कोशिश, युवाओं को बिना गर्भनिरोधक संबंधों के लिए प्रेरित कर रहा चीन