US Israel Iran War: ईरान-अमेरिका जंग के बीच बड़ी हलचल! अराघची ने एस जयशंकर और लावरोव से की बात

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारतीय विदेश मंत्री के अलावा रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी फोन पर लंबी बातचीत की।

US Israel Iran War

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 6, 2026

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US Israel Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से फोन पर बातचीत की। यह बातचीत ऐसे समय पर हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से नहीं खोला गया तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट कर दिया जाएगा।

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भारत-ईरान बातचीत

एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्हें ईरानी विदेश मंत्री का फोन आया और मौजूदा हालात पर चर्चा हुई। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने भी पुष्टि की कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर विचार किया। जयशंकर ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के प्रयासों पर जोर दिया और कहा कि भारत युद्ध को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही कोशिशों का समर्थन करता है।

ईरान का आरोप और चेतावनी

अराघची ने बातचीत में कहा कि अमेरिका और इजरायल औद्योगिक ढांचों, फैक्ट्रियों, अस्पतालों, स्कूलों, रिहायशी इलाकों और परमाणु केंद्रों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़े देशों से अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर जिम्मेदार रवैया अपनाएं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका और इजरायल के हमलों का असर पूरे क्षेत्र और दुनिया की स्थिरता पर पड़ सकता है। ईरान ने साफ किया कि उसकी जनता और सेना अपने देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

रूस-ईरान बातचीत

भारत के अलावा अराघची ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी टेलीफोन पर बातचीत की। उन्होंने पिछले 37 दिनों में ईरानी जनता पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों की जानकारी दी। इसके बाद रूस ने अमेरिका के लिए अल्टीमेटम जारी किया। लावरोव ने कहा कि अमेरिका को “अल्टीमेटम की भाषा छोड़कर बातचीत के रास्ते पर लौटना चाहिए।” उन्होंने उम्मीद जताई कि युद्ध को कम करने की कोशिशें सफल होंगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य और भारत की चिंता

फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान ने बंद कर दिया है। इसके चलते तेल और गैस की कीमतों में वैश्विक स्तर पर तेजी आई है। भारत की ऊर्जा खरीद का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। ईरान ने भारत समेत अपने मित्र देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। भारत ने हाल के दिनों में कूटनीतिक प्रयास तेज किए हैं ताकि संघर्ष जल्द समाप्त हो और ऊर्जा आपूर्ति निर्बाध बनी रहे। भारत का मानना है कि यदि यह नाकेबंदी जारी रही तो ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

ईरान की भारत और रूस से हुई बातचीत ने पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालात को और गंभीर बना दिया है। अमेरिका की चेतावनी, ईरान की प्रतिक्रिया और रूस का अल्टीमेटम इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक समीकरण और जटिल हो सकते हैं। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा है, जिसके लिए वह लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।

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