Iran-Israel War: नतान्ज परमाणु केंद्र पर अमेरिका-इजरायल का भीषण हमला, क्या फैल गया रेडिएशन? जानें जमीनी हालात

ईरान के सबसे संवेदनशील नतान्ज परमाणु संवर्धन केंद्र पर शनिवार सुबह अमेरिका और इजरायल ने मिलकर भीषण हवाई हमला किया है। युद्ध के चौथे हफ्ते में हुए इस हमले से परमाणु विकिरण फैलने का डर था, लेकिन शुरुआती जांच में राहत की खबर मिली है। आखिर इस हमले का असली मकसद क्या था?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 21, 2026

Iran-Israel War:  मध्य पूर्व में जारी महायुद्ध अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार, 21 मार्च 2026 को अमेरिका और इजरायल की वायु सेनाओं ने संयुक्त रूप से ईरान के सबसे संवेदनशील परमाणु संवर्धन केंद्र ‘नतान्ज’ (Natanz) पर एक और बड़ा हवाई हमला किया। ईरान की सरकारी मीडिया और अलजजीरा की रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला इतना जोरदार था कि धमाकों की गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। हालांकि, शुरुआती जांच के बाद राहत की खबर यह है कि इस हमले से किसी भी प्रकार के रेडियोएक्टिव विकिरण (Radioactive Leak) का रिसाव नहीं हुआ है।

नतान्ज परमाणु सुविधा पर दोबारा हमला: तस्नीम न्यूज़ की रिपोर्ट

ईरान की तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने पुष्टि की है कि अमेरिका और इजरायल ने शनिवार की अलसुबह नतान्ज परिसर को निशाना बनाया। हमले के तुरंत बाद परमाणु विशेषज्ञों की एक टीम ने साइट का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि, “परमाणु संवर्धन केंद्र के मुख्य ढांचे को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी, लेकिन सुरक्षा मानकों के कारण रेडियोएक्टिव सामग्री सुरक्षित है।” इस हमले से न केवल नतान्ज के निवासियों में दहशत फैल गई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के लिए स्वास्थ्य संबंधी कोई खतरा नहीं है।

ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने की जिद: अमेरिका-इजरायल की रणनीति

नतान्ज ईरान का मुख्य यूरेनियम संवर्धन केंद्र है और अमेरिका व इजरायल इसे किसी भी कीमत पर नष्ट करना चाहते हैं। उनका मानना है कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार विकसित कर लिए, तो यह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा होगा। युद्ध के पहले सप्ताह में भी इस केंद्र पर भारी बमबारी की गई थी, जिसमें सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार कई महत्वपूर्ण इमारतें जमींदोज हो गई थीं। ईरान के ‘एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइजेशन’ ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे एक “अपराधपूर्ण कृत्य” करार दिया है और इसे शहीद अहमदी रोशन संवर्धन सुविधा को पंगु बनाने की एक गहरी साजिश बताया है।

अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन और एनपीटी (NPT) पर संकट

ईरान ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और प्रतिबद्धताओं का खुला उल्लंघन बताया है। तेहरान का तर्क है कि परमाणु केंद्रों पर हमला करना ‘परमाणु हथियारों के अप्रसार संधि’ (NPT) और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा नियमों के विरुद्ध है। यह केंद्र तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है और जून 2025 में हुए 12-दिवसीय युद्ध के दौरान भी इसे निशाना बनाया गया था। ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल की यह कार्रवाई वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा खतरा है और वे जानबूझकर परमाणु आपदा की स्थिति पैदा कर रहे हैं।

तीन हफ्ते से जारी जंग: मिसाइल और ड्रोन हमलों से दहल उठा मिडिल-ईस्ट

इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े इस युद्ध को अब 21 दिन से अधिक का समय हो चुका है और संघर्ष कम होने के बजाय और अधिक आक्रामक होता जा रहा है। इजरायली सेना के अनुसार, शनिवार सुबह भी ईरान ने इजरायल के रिहायशी इलाकों पर मिसाइलें दागना जारी रखा। वहीं, सऊदी अरब ने भी इस संघर्ष में अपनी सक्रियता की जानकारी देते हुए बताया कि उसने अपने तेल प्रतिष्ठानों की रक्षा करते हुए पिछले कुछ घंटों में 20 से अधिक ईरानी ड्रोनों को मार गिराया है। यह युद्ध अब केवल तीन देशों तक सीमित न रहकर पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुका है।

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