US Iraq Mission: अमेरिकी सेना की इराक से पूर्ण वापसी, 12 साल बाद IS विरोधी मिशन खत्म

इराक में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के एक बड़े अध्याय का अंत हो गया है। करीब 12 साल तक चले IS विरोधी मिशन के बाद अमेरिकी सेना ने देश से अपनी वापसी पूरी कर ली है। अब सुरक्षा की जिम्मेदारी इराकी बलों के हाथों में होगी। इस बदलाव से क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रहेगी।

US Iraq Mission

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 30, 2026

US Iraq Mission : अमेरिकी सेना ने बुधवार को इराक से अपने सैनिकों की पूर्ण वापसी की घोषणा की। इसके साथ ही इस्लामिक स्टेट (IS) के खिलाफ वर्ष 2014 में शुरू हुआ अमेरिका के नेतृत्व वाला सैन्य अभियान औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने बताया कि अमेरिकी सैनिक और सैन्य उपकरण उत्तरी इराक स्थित उस अंतिम हवाई अड्डे से भी रवाना हो गए, जहां अमेरिकी जवान अब तक तैनात थे। यह घटनाक्रम इराक में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के एक महत्वपूर्ण अध्याय के अंत के तौर पर देखा जा रहा है।

12 साल के अभियान को बताया बड़ी उपलब्धि

पेंटागन प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने अमेरिकी मिशन की समाप्ति को एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों के अभियान ने इराक और व्यापक क्षेत्र में आईएस को एक संगठित सैन्य खतरे के रूप में कमजोर करने में भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, अब यह अभियान युद्धकालीन गठबंधन मिशन से इराक के नेतृत्व वाले सुरक्षा प्रयास की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ दोनों देशों के बीच अधिक सामान्य द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।

2003 में अमेरिका ने किया था इराक पर हमला

इराक में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी की शुरुआत मौजूदा आईएस विरोधी अभियान से काफी पहले हुई थी। अमेरिका ने वर्ष 2003 में इराक पर सैन्य हमला किया था। इसके बाद अमेरिकी सैनिक कई वर्षों तक वहां तैनात रहे और 2011 में उनकी वापसी हुई। हालांकि, क्षेत्र में परिस्थितियां तेजी से बदलीं और कुछ ही वर्षों बाद इराक में एक नए सुरक्षा संकट ने जन्म लिया।

2014 में IS के उभार के बाद फिर लौटे अमेरिकी सैनिक

वर्ष 2014 में इस्लामिक स्टेट के तेजी से विस्तार और मोसुल जैसे महत्वपूर्ण शहरों पर उसके कब्जे के बाद इराक में सुरक्षा स्थिति गंभीर हो गई। इसके बाद अमेरिका के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाया गया और अमेरिकी सैनिक दोबारा इराक पहुंचे। इस मिशन का उद्देश्य आईएस के खिलाफ इराकी सुरक्षा बलों की मदद करना था। अमेरिकी सहायता में प्रशिक्षण, खुफिया जानकारी साझा करना और हवाई समर्थन जैसी गतिविधियां शामिल थीं।

इराक की सुरक्षा जिम्मेदारी अब इराकी बलों पर

अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी के बाद इराक की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी और अधिक स्पष्ट रूप से इराकी सुरक्षा संस्थानों पर होगी। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, आईएस को संगठित सैन्य खतरे के रूप में परास्त करने के बाद अब दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग का स्वरूप बदल रहा है। हालांकि, आतंकवादी समूह के अवशेषों और क्षेत्रीय अस्थिरता से जुड़ी चुनौतियां अभी भी सुरक्षा एजेंसियों के सामने बनी हुई हैं।

अमेरिकी वापसी को संप्रभुता से जोड़कर देखा जा रहा

इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी को देश की संप्रभुता के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से इराक में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विदेशी सैन्य मौजूदगी को समाप्त करने की मांग उठती रही है। अमेरिकी सैनिकों की वापसी इस बहस में एक अहम घटनाक्रम है। दूसरी ओर, अमेरिका का कहना है कि मौजूदा सैन्य अभियान का उद्देश्य पूरा हो चुका है और अब संबंधों को सामान्य द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

वापसी के बाद इराक के सामने नई चुनौतियां

अमेरिकी सैन्य अभियान समाप्त होने के बावजूद इराक के सामने सुरक्षा से जुड़ी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। आईएस की संगठित सैन्य क्षमता को खत्म करने का दावा किए जाने के बाद भी उसके बचे हुए नेटवर्क और क्षेत्रीय अस्थिरता पर नजर रखना जरूरी होगा। आने वाले समय में इराकी सुरक्षा बल विदेशी सैन्य मौजूदगी के बिना देश की सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह संभालते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा। साथ ही पश्चिम एशिया में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इराक की भूमिका भी अहम रह सकती है। पेंटागन ने अमेरिकी वापसी से जुड़े अन्य विस्तृत विवरण फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए हैं।

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