US-Iran War: होर्मुज स्ट्रेट में परमाणु पनडुब्बी! कीर स्टार्मर का बड़ा फैसला, ईरान की घेराबंदी शुरू

समुद्र का सबसे घातक शिकारी अब होर्मुज स्ट्रेट में! 1600 KM की मारक क्षमता वाली टॉमहॉक मिसाइलों और स्पीयरफिश टॉरपीडो से लैस ब्रिटिश परमाणु पनडुब्बी HMS Anson ने संभाला मोर्चा।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 22, 2026

US-Iran War: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को तीन हफ्तों से अधिक समय हो चुका है, लेकिन हालात शांत होने के बजाय और अधिक तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए हैं, वहीं अब ब्रिटेन ने भी अपनी सैन्य सक्रियता बढ़ा दी है।

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कीर स्टार्मर का रणनीतिक फैसला

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने एक अहम कदम उठाते हुए परमाणु ऊर्जा से चलने वाली अपनी आधुनिक पनडुब्बी को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तैनात कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पनडुब्बी अरब सागर के उत्तरी हिस्से में पहुंच चुकी है और एक महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थिति संभाल रही है।

बताया जा रहा है कि यह पनडुब्बी इस महीने की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर से रवाना हुई थी। अब इसकी मौजूदगी ऐसे क्षेत्र में है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। इस तैनाती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि ब्रिटेन भी इस तनावपूर्ण स्थिति में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।

पनडुब्बी की ताकत और हथियार

यह ब्रिटिश पनडुब्बी अत्याधुनिक तकनीक और शक्तिशाली हथियारों से लैस है। इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाली टॉमहॉक ब्लॉक IV मिसाइलें तैनात हैं, जिनकी रेंज करीब 1,600 किलोमीटर तक बताई जाती है। इसके अलावा इसमें स्पीयरफिश हैवीवेट टॉरपीडो भी शामिल हैं, जो समुद्री युद्ध में बेहद प्रभावी माने जाते हैं।

इन हथियारों के कारण यह पनडुब्बी दुश्मन के ठिकानों को दूर से ही निशाना बनाने में सक्षम है। इसकी मौजूदगी से क्षेत्र में सैन्य संतुलन प्रभावित हो सकता है और यह विरोधी पक्ष के लिए एक मजबूत चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

बढ़ते संघर्ष में ब्रिटेन की भागीदारी

ब्रिटिश पनडुब्बी की तैनाती इस बात का संकेत मानी जा रही है कि अब ब्रिटेन भी इस क्षेत्रीय संघर्ष में अधिक सक्रिय हो सकता है। इससे पहले भी ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपने सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति दी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायल की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होती नजर आ रही है। वहीं दूसरी ओर, ईरान के साथ तनाव और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

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