US Iran War 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक इजरायल यात्रा के बीच मध्य पूर्व का रणक्षेत्र पूरी तरह दहक उठा है। पीएम मोदी के तेल-अवीव पहुँचने से ठीक पहले अमेरिका ने इजरायली वायुसेना बेस पर अपने सबसे घातक F-22 रैप्टर फाइटर जेट्स को तैनात कर दिया है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि ईरान के खिलाफ एक बड़े युद्ध की प्रस्तावना है। अमेरिकी वायुसेना के 11 लड़ाकू विमानों का इजरायली धरती पर उतरना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि क्षेत्र में किसी भी समय भीषण संघर्ष छिड़ सकता है। फिलहाल, वाशिंगटन ने अपनी सैन्य कार्रवाइयों को प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के सम्मान में ‘होल्ड’ पर रखा है, ताकि कूटनीतिक मर्यादा बनी रहे।
इतिहास में पहली बार: बिना किसी अभ्यास के अमेरिकी लड़ाकू विमानों की तैनाती
इजरायल और अमेरिका के सैन्य संबंधों के इतिहास में बुधवार का दिन एक मील का पत्थर साबित हुआ है। यह पहली बार है जब अमेरिका ने किसी संयुक्त प्रशिक्षण या रूटीन अभ्यास के बिना, सीधे तौर पर ‘ऑपरेशनल’ यानी युद्ध मिशन के लिए अपने जेट इजरायल भेजे हैं। F-22 रैप्टर दुनिया के सबसे उन्नत ‘स्टील्थ’ फाइटर जेट माने जाते हैं, जिन्हें रडार की पकड़ में लाना लगभग नामुमकिन है। इनका इजरायली बेस पर उतरना यह दर्शाता है कि पेंटागन ने ईरान की घेराबंदी पूरी कर ली है और अब बस अंतिम आदेश का इंतजार है।
दुनिया का सबसे घातक विमानवाहक पोत तैनात: परमाणु युद्ध का खतरा
अमेरिकी तैयारियों की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया का सबसे बड़ा और खतरनाक न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर, यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड (USS Gerald R. Ford), इजरायल के तट के बेहद करीब पहुँच चुका है। हजारों सैनिकों और पचासों युद्धक विमानों से लैस यह तैरता हुआ सैन्य द्वीप ईरान के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। अमेरिका ने ईरान को चारों ओर से घेर लिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में परमाणु युद्ध की आशंका बढ़ गई है। सामरिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की 25-26 फरवरी की यह यात्रा एक बहुत ही नाजुक समय पर हो रही है, जहाँ कूटनीति और युद्ध के बीच एक बारीक रेखा खिंच गई है।
पीएम मोदी की सुरक्षा और कूटनीति: भारत वापसी के बाद बदलेंगे समीकरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर इजरायल पहुँच रहे हैं, जहाँ वे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताओं और रक्षा सौदों पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल ने आपसी सहमति से यह तय किया है कि जब तक भारत के प्रधानमंत्री इजरायली धरती पर मौजूद हैं, तब तक ईरान पर कोई भी बड़ा हमला नहीं किया जाएगा। पीएम मोदी बृहस्पतिवार को भारत के लिए प्रस्थान करेंगे। कूटनीतिक सूत्रों का दावा है कि प्रधानमंत्री के विमान के भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही, मध्य पूर्व में अमेरिकी और इजरायली सेनाएं ईरान के खिलाफ अपना ‘फाइनल ऑपरेशन’ शुरू कर सकती हैं।
भारत-इजरायल रक्षा सौदे और क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव
इस तनावपूर्ण माहौल में पीएम मोदी की यात्रा का महत्व और अधिक बढ़ गया है। जहाँ एक ओर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत और इजरायल के बीच कई रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। भारत इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सीधे टकराव ने नई दिल्ली की कूटनीति के लिए भी नई चुनौतियां पेश कर दी हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें बृहस्पतिवार शाम पर टिकी हैं, जब पीएम मोदी की स्वदेश वापसी के साथ ही इस युद्ध की अगली दिशा तय होगी।
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