US-Iran Tension: मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर गंभीर होते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के शक्तिशाली सैन्य संगठन ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) को सख्त चेतावनी दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान को निर्देश दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी उकसावे वाली गतिविधियों को तुरंत बंद करे। यह तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान ने घोषणा की कि वह रविवार से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में दो दिवसीय ‘लाइव-फायर’ नौसैनिक अभ्यास करेगा। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में किसी भी असुरक्षित गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Congo Tragedy: कांगो की कोल्टन खदान में भूस्खलन, 200 से ज्यादा मजदूरो ने गंवाई जान
वैश्विक व्यापारिक मार्ग पर खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक मार्गों में से एक है। यहां से रोजाना लगभग 100 बड़े तेल और व्यापारिक टैंकर गुजरते हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि ईरान को अपना अभ्यास पेशेवर तरीके से करना चाहिए ताकि समुद्री यातायात की स्वतंत्रता प्रभावित न हो। अमेरिका ने उन गतिविधियों की सूची भी जारी की है जिन्हें वह ‘असुरक्षित’ मानता है, जैसे—अमेरिकी जहाजों के ऊपर से लड़ाकू विमान उड़ाना, हथियारों के साथ संदिग्ध रूप से करीब आना, तेज नावों से घेराबंदी करना या अमेरिकी सैन्य संपत्तियों पर हथियार तानना। सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया है कि वह अपने जहाजों और कर्मियों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
ट्रंप की संभावित मंजूरी
इस कूटनीतिक तनाव के बीच खुफिया रिपोर्टों ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसी सप्ताहांत ईरान पर प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई की मंजूरी दे सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने अपने सहयोगी देशों को संकेत दिया है कि यदि अंतिम निर्णय लिया जाता है, तो रविवार को ईरान के खिलाफ हवाई हमले शुरू हो सकते हैं। एक पूर्व वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी रणनीतिकारों ने ईरान के परमाणु ठिकानों, बैलिस्टिक मिसाइल डिपो और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य केंद्रों की सूची तैयार कर ली है।
सैन्य कार्रवाई और सत्ता परिवर्तन
अमेरिका की संभावित कार्रवाई केवल ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को नष्ट करने तक सीमित नहीं होगी। इसका मुख्य उद्देश्य IRGC के नेतृत्व और उनकी परिचालन क्षमता को कमजोर करना है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यदि ईरानी सैन्य नेतृत्व पर सटीक प्रहार किया गया, तो जनता मौजूदा सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर सकती है। इस आंतरिक दबाव से सरकार कमजोर होगी या गिर सकती है। इस रणनीति का लक्ष्य ईरान की क्षेत्रीय आक्रामकता को समाप्त करना है।
इजरायल का समर्थन और भविष्य की योजना
इस घटनाक्रम में इजरायल की भूमिका अहम मानी जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप को आश्वासन दिया है कि सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान में नई और स्थिर सरकार बनाने की प्रक्रिया में इजरायल सक्रिय सहयोग करेगा। इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता रहा है। अमेरिका और इजरायल का साझा रुख संकेत देता है कि मध्य पूर्व के राजनीतिक परिदृश्य में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
विश्व युद्ध की आशंका
यदि अमेरिका रविवार को ईरान पर हमला करता है, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने से लेकर क्षेत्रीय युद्ध छिड़ने तक की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समय वाशिंगटन और तेहरान की अगली चाल पर नजर बनाए हुए है। शांति की उम्मीदें कम होती जा रही हैं और अब सब कुछ इस पर निर्भर करेगा कि ईरान अमेरिका की अंतिम चेतावनी के बाद पीछे हटता है या टकराव का रास्ता चुनता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिए निर्णायक साबित होगा।
Trump Gaza Riviera: ट्रंप का गाजा को ‘रिवेरा’ बनाने का प्रस्ताव, फिलिस्तीन ने रखी अपनी शर्तें









