US-Iran Tension: ‘अमेरिका अब किसी अंतहीन युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा’, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बोले जेडी वेंस

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर परमाणु हमला करने की जगह कूटनीतिक दबाव बनाने का संकेत दिया है। वेंस ने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन अब किसी 'अंतहीन युद्ध' में नहीं फंसेगा, लेकिन ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी। क्या अमेरिका की यह नई रणनीति सफल होगी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 27, 2026

US-Iran Tension:  अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में दिए गए एक महत्वपूर्ण इंटरव्यू में ट्रंप प्रशासन की आगामी विदेश नीति का खाका पेश किया है। वेंस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका अब अतीत की उन सैन्य गलतियों को दोहराने के लिए तैयार नहीं है, जिन्होंने देश को लंबे और बेनतीजा संघर्षों में झोंक दिया था। मध्य पूर्व, विशेषकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव के बीच, वेंस का यह बयान वैश्विक राजनीति में एक नई दिशा का संकेत देता है। उन्होंने जोर दिया कि ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत अब प्राथमिकता कूटनीति और अमेरिकी नागरिकों के प्रत्यक्ष हितों को दी जाएगी, न कि दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में अंतहीन हस्तक्षेप को।

सैन्य विकल्प खुले, लेकिन लंबे संघर्षों से तौबा

‘एयर फोर्स टू’ पर बातचीत के दौरान उपराष्ट्रपति वेंस ने उन कयासों को सिरे से खारिज कर दिया कि अमेरिका फिर से किसी क्षेत्रीय युद्ध में दशकों के लिए उलझ सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने के लिए सैन्य विकल्प हमेशा मेज पर मौजूद रहते हैं, लेकिन प्रशासन की मंशा इन्हें एक स्थायी युद्ध में बदलने की कतई नहीं है। वेंस ने कहा, “हम अपनी सेना को बिना किसी स्पष्ट लक्ष्य या समय सीमा वाले अभियानों में नहीं झोंकेंगे।” अमेरिका अब इस क्षेत्र में रणनीतिक संयम बरतने की योजना बना रहा है, ताकि संसाधनों का सही दिशा में उपयोग किया जा सके।

ट्रंप की कूटनीतिक बिसात: ईरान के व्यवहार पर टिकी नजर

ईरान के परमाणु मंसूबों को विफल करने के लिए ट्रंप प्रशासन एक दोहरी रणनीति अपना रहा है। वेंस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के पास कूटनीतिक दबाव और सैन्य शक्ति का सही संतुलन है। वर्तमान में जिनेवा में जारी उच्च स्तरीय वार्ताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका एक शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देता है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सारा दारोमदार ईरानी शासन के व्यवहार पर निर्भर करेगा। यदि कूटनीति विफल होती है, तो अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा, लेकिन वे कदम सटीक और सीमित होंगे।

अतीत की विफलताओं से सबक: वेंस का व्यक्तिगत अनुभव

इराक युद्ध में अपनी सेवाएं दे चुके जेडी वेंस विदेशी हस्तक्षेपों के कट्टर आलोचक रहे हैं। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर आगाह किया कि अमेरिका को वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान जैसे लंबे युद्धों से सीख लेनी चाहिए। उनका मानना है कि ट्रंप की सोच भी इसी दिशा में है कि किसी भी अगले सैन्य कदम को बहुत सोच-समझकर और सतर्कता के साथ ही उठाया जाए। वेंस ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की नीतियां केवल अमेरिकी जनता के लाभ और उनकी सुरक्षा को केंद्र में रखकर बनाई जा रही हैं, ताकि देश को बाहरी विवादों के बोझ से सुरक्षित रखा जा सके।

इजरायल के साथ संबंध और क्षेत्रीय स्थिरता की चुनौती

मध्य पूर्व की स्थिरता में इजरायल की भूमिका पर चर्चा करते हुए वेंस ने उसे एक अनिवार्य रणनीतिक सहयोगी बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी राजनीति के भीतर विदेशी मदद और सैन्य गठबंधन को लेकर उठने वाली विविध आवाजों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दो दशकों से अधिक समय तक मध्य पूर्व में भारी सैन्य मौजूदगी के बाद, अब अमेरिका अपने विदेशी हस्तक्षेप को सीमित करने की दिशा में बढ़ रहा है। यूरोपीय देशों और अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों के माध्यम से जारी शांति प्रयासों का उद्देश्य परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकना और क्षेत्र में एक स्थायी शांति स्थापित करना है।

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