US Iran Tension 2026 : ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता की संभावनाओं के बीच वैश्विक कूटनीति में एक नया उबाल आ गया है। तेहरान ने सद्भावना दिखाते हुए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को सभी देशों के लिए खोलने का निर्णय लिया था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया ने सुलह की कोशिशों पर पानी फेर दिया है। ट्रंप ने न केवल इसे अमेरिका की एकतरफा जीत बताया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि जब तक तेहरान के साथ कोई संपूर्ण और अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक ईरान पर लगी नाकाबंदी (Blockade) नहीं हटाई जाएगी। ट्रंप के इस अड़ियल रुख ने बातचीत की मेज सजने से पहले ही दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है।
ईरान का पलटवार: ‘ट्रंप ने एक घंटे में बोले सात सफेद झूठ’
अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों पर ईरान ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा हमला बोलते हुए उन पर महज एक घंटे के भीतर सात बड़े झूठ बोलने का आरोप लगाया है। गालिबाफ ने स्पष्ट किया कि झूठ बोलकर न तो युद्ध जीता जा सकता है और न ही कूटनीतिक मेज पर कोई सफलता हासिल की जा सकती है। ईरान का मानना है कि ट्रंप सोशल मीडिया के जरिए जनमत को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरानी राष्ट्र इन चालों से प्रभावित होने वाला नहीं है।
होर्मुज को फिर से बंद करने की धमकी: नाकाबंदी पर ईरान सख्त
संसद अध्यक्ष गालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आर्थिक और नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहती है, तो ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को खुला रखना संभव नहीं होगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को “निर्धारित मार्ग” का पालन करना होगा और इसके लिए “ईरानी प्राधिकरण” से पूर्वानुमति लेना अनिवार्य होगा। गालिबाफ ने ट्रंप को आईना दिखाते हुए कहा कि जलडमरूमध्य खुला रहेगा या बंद, इसका फैसला सोशल मीडिया की पोस्ट से नहीं बल्कि जमीनी हकीकत और ईरान की सुरक्षा जरूरतों के आधार पर किया जाएगा।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और क्षेत्रीय शांति के प्रयास
तनाव के इस माहौल के बीच ईरान ने मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान और उसके सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के प्रयासों की सराहना की है। गालिबाफ ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक पोस्ट में कहा कि वे अपनी प्रतिज्ञाओं के प्रति सच्चे हैं और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सम्मान करते हैं। पाकिस्तानी नेतृत्व ने दोनों देशों के बीच संचार के रास्ते खोलने और युद्ध की स्थिति को टालने के लिए हाल के दिनों में सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभाई है, जिसे ईरान ने एक सकारात्मक कदम माना है।
इजरायल-लेबनान युद्धविराम और हिजबुल्लाह का जिक्र
ईरानी स्पीकर ने क्षेत्रीय संघर्षों पर बात करते हुए इजरायल और लेबनान के बीच हुए हालिया युद्धविराम को हिजबुल्लाह और ‘प्रतिरोध की धुरी’ (Axis of Resistance) की एकता का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि ईरान इस युद्धविराम को सतर्कता के साथ देख रहा है और वह पूर्ण विजय प्राप्त होने तक अपने सहयोगियों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। गालिबाफ के इस बयान से साफ है कि ईरान केवल अमेरिका के साथ ही नहीं, बल्कि समूचे पश्चिम एशिया के समीकरणों में अपनी सक्रिय भागीदारी बनाए रखना चाहता है।
कूटनीति की राह में अविश्वास का रोड़ा
ईरान और अमेरिका के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी हो गई है कि एक छोटी सी उपलब्धि भी विवाद का कारण बन रही है। जहाँ दुनिया एक और तेल संकट से बचने के लिए होर्मुज के खुलने का इंतजार कर रही थी, वहीं ट्रंप की बयानबाजी ने फिर से अनिश्चितता पैदा कर दी है। यदि अमेरिका अपनी नाकाबंदी की नीति पर अडिग रहता है, तो ईरान द्वारा दोबारा होर्मुज को बंद करने की धमकी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी झटके से कम नहीं होगी। अब सबकी नजरें आगामी शांति वार्ता पर टिकी हैं, जिसका भविष्य फिलहाल धुंधला नजर आ रहा है।
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