US Iran Talks: इस्लामाबाद टॉक से पहले ईरान का सख्त रुख, ट्रंप को दो टूक जवाब

इस्लामाबाद में प्रस्तावित शांति वार्ता से पहले अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने ट्रंप के बयानों पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया है। क्या यह वार्ता सफल होगी या वैश्विक टकराव और गहराएगा, जानिए पूरी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक कहानी विस्तार से

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अप्रैल 21, 2026

US Iran Talks: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान में दूसरे दौर की बातचीत प्रस्तावित है। इस वार्ता का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव और संभावित संघर्ष को खत्म करना है, लेकिन हालात अब भी स्पष्ट नहीं हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात कही है, जबकि ईरान की भागीदारी को लेकर अब भी असमंजस बना हुआ है। पाकिस्तान लगातार कोशिश कर रहा है कि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आएं।

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ईरान की नाराजगी और सख्त रुख

ईरान की नाराजगी और सख्त रुख
ईरान की नाराजगी और सख्त रुख

अमेरिका की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी और सीजफायर के उल्लंघन से ईरान काफी नाराज है। शुरुआत में ईरान ने इस्लामाबाद जाने से इनकार कर दिया था, लेकिन पाकिस्तान के प्रयासों के बाद अब वह विचार कर रहा है। इसी बीच ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका देश किसी भी तरह की धमकी के दबाव में बातचीत स्वीकार नहीं करेगा।

“धमकी के साये में बातचीत नहीं”

गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्रंप बातचीत की प्रक्रिया को दबाव और सरेंडर की स्थिति में बदलना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका घेराबंदी और संघर्षविराम तोड़कर हालात को और बिगाड़ रहा है। गालिबाफ ने यह भी कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में ईरान ने युद्ध के मैदान में नई रणनीतियों की तैयारी कर ली है, जिससे यह साफ होता है कि वह किसी भी स्थिति के लिए तैयार है।

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कूटनीतिक प्रक्रिया में बाधाएं

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि लगातार सीजफायर का उल्लंघन कूटनीतिक प्रयासों में सबसे बड़ी रुकावट बन रहा है। अराघची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री से बातचीत में बताया कि ईरान सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है, लेकिन आगे की रणनीति पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और प्रयास

पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और चाहता है कि दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकालें। पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भी ट्रंप से बातचीत की है और होर्मुज नाकेबंदी को वार्ता में सबसे बड़ी बाधा बताया है। पाकिस्तान का मानना है कि अगर यह मुद्दा हल हो जाता है तो बातचीत का रास्ता साफ हो सकता है।

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ट्रंप का बयान और अमेरिका का रुख

दूसरी ओर, ट्रंप ने दावा किया है कि इस संघर्ष में अमेरिका की स्थिति मजबूत है और वह जीत की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हो जाता, तब तक होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी रहेगी।