US-Iran Peace Talks: ईरान का बड़ा यू-टर्न! अमेरिका की 3 शर्तों पर झुका तेहरान, जानें अब क्या होगा?

इस्लामाबाद के रेड जोन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ के बीच हुई मुलाकात ने युद्ध की दिशा बदल दी है। हफ्तों की बमबारी के बाद ईरान ने अमेरिका की वे 3 शर्तें स्वीकार कर ली हैं, जिन पर वह पहले अड़ा हुआ था। आखिर क्या हैं वे शर्तें?

US-Iran Peace Talks

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 11, 2026

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शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक ऐतिहासिक कूटनीतिक घटनाक्रम का केंद्र बनी, जहां लंबे समय से एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत शुरू हुई। दोनों देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों (डेलिगेशन) ने करीब दो घंटे तक आमने-सामने बैठकर गहन चर्चा की। इस बातचीत को लेकर वैश्विक स्तर पर भारी उत्सुकता है क्योंकि ईरान ने अपनी उस पुरानी नीति का त्याग कर दिया है, जिसमें वह अमेरिका के साथ सीधे संवाद से इनकार करता रहा था। हालांकि ईरान ने शुरुआत में दो कड़ी शर्तें रखी थीं, जिन्हें अमेरिका ने स्वीकार नहीं किया, फिर भी शांति की खातिर ईरान ने लचीला रुख अपनाते हुए बातचीत को जारी रखा है।

राष्ट्रपति ट्रंप की सीधी निगरानी और जेडी वेंस की ‘शांति दूत’ के रूप में भूमिका

इस वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस्लामाबाद में हो रही हर हलचल की पल-पल की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल हर छोटे-बड़े मुद्दे पर फोन के जरिए सीधे ट्रंप से संपर्क कर रहे हैं और उनकी सहमति ले रहे हैं। अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस खुद इस बातचीत का नेतृत्व करने इस्लामाबाद पहुंचे हैं। ईरान को इस बात का भलीभांति आभास है कि व्हाइट हाउस में जेडी वेंस ही वे प्रमुख व्यक्ति हैं जो फिलहाल ईरान के साथ पूर्ण युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। इसी भरोसे के चलते ईरान ने अपनी शर्तों पर समझौता किया है ताकि आने वाले समय में उसे अमेरिकी प्रतिबंधों से कुछ रियायत मिल सके।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और तीन-तरफ़ा बातचीत का नया मंच

यह वार्ता अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच हुई मुलाकात के बाद संभव हो पाई। पाकिस्तान ने इस मामले में एक सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री शरीफ ने ईरानी डेलिगेशन के साथ भी अलग से बैठक की, जिसमें ईरान ने अपने पुराने प्रस्तावों पर फिर से जोर दिया। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह तीन-तरफ़ा बातचीत (अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान) दक्षिणी लेबनान पर इजराइली हमलों में कमी लाने और क्षेत्रीय शांति की संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्य से शुरू हुई है।

उप राष्ट्रपति वेंस की प्रतिष्ठा और डोनाल्ड ट्रंप की ‘हार्ड लाइन’ चेतावनी

इस बातचीत में जेडी वेंस की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। पाकिस्तान के लिए रवाना होने से पहले वेंस ने स्पष्ट शब्दों में ईरान को चेतावनी दी थी कि वह अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार का “खेल” न करे। वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान सैन्य रूप से हार चुका है और उसके पास शांति वार्ता के लिए कोई ठोस विकल्प नहीं बचे हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान आज सिर्फ इसलिए बातचीत की मेज पर है क्योंकि वह अपना वजूद बचाना चाहता है। इस बातचीत का मुख्य लक्ष्य एक नाजुक सीजफायर को स्थाई शांति समझौते में बदलना है।

युद्ध की विभीषिका: हजारों मौतें और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट

जहां एक ओर इस्लामाबाद में शांति की मेज सजी है, वहीं दूसरी ओर लेबनान में इजराइली हमले जारी हैं। शनिवार सुबह हुए हमलों में कम से कम तीन लोग मारे गए, जिसने शांति वार्ता की शर्तों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस भीषण युद्ध के आंकड़े डराने वाले हैं; अब तक ईरान में 3,000, लेबनान में 1,953 और इजराइल में 23 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस संघर्ष ने फारस की खाड़ी को वैश्विक अर्थव्यवस्था से काट दिया है, जिसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं और आधा दर्जन देशों का बुनियादी ढांचा पूरी तरह तबाह हो चुका है। विश्व समुदाय की नजरें अब इस्लामाबाद के नतीजों पर टिकी हैं।

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