US Iran Peace Agreement : अमेरिका-ईरान शांति समझौते की तैयारी, जानिए क्या हैं इसकी मुख्य शर्तें

खाड़ी क्षेत्र में जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबरें तेज हैं; अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक "बड़ी शांति डील" का दावा किया है, लेकिन ईरान की तरफ से अब भी सावधानी बरती जा रही है; जानिए समझौते की वे मुख्य शर्तें क्या हैं जो दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं?

US Iran Peace Agreement

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 12, 2026

US Iran Peace Agreement : वैश्विक कूटनीति के मंच से एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। लंबे समय से एक-दूसरे के धुर-विरोधी रहे अमेरिका और ईरान के बीच एक व्यापक शांति समझौते का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसकी अत्यंत संवेदनशील शर्तों का खुलासा हुआ है। ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी द्वारा जारी की गई एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्तावित समझौते के शुरुआती मसौदे (ड्राफ्ट) में कुल 14 बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक पॉइंट्स को शामिल किया गया है।

इस संधि पत्र में सबसे पहली और प्राथमिक शर्त यह रखी गई है कि दोनों पक्षों से जुड़े सभी मोर्चों पर चल रहे युद्ध और सैन्य संघर्षों को तुरंत तथा स्थायी रूप से पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। इस शांति प्रस्ताव के दायरे में लेबनान के क्षेत्र में चल रहा भीषण सैन्य संघर्ष भी शामिल है। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को भी अगले 30 दिनों के भीतर आम आवाजाही के लिए फिर से खोलने का प्रस्ताव है, हालांकि इसका पूरा नियंत्रण और संचालन ईरान की कड़ी निगरानी में ही किया जाएगा।

संप्रभुता का सम्मान और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की शर्त

प्रस्तावित ड्राफ्ट के मुख्य प्रावधानों के अनुसार, अमेरिका को यह लिखित वचन देना होगा कि वह ईरान के किसी भी प्रकार के आंतरिक राजनीतिक मामलों में कोई दखलअंदाजी नहीं करेगा और एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में उसकी अखंडता का पूरा सम्मान करेगा। इसके बदले में, अमेरिका को समझौता लागू होने के 30 दिनों के भीतर ईरान के समुद्री क्षेत्रों से अपनी सभी प्रकार की नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) को पूरी तरह से हटाना होगा। केवल इतना ही नहीं, बल्कि अमेरिका को ईरान की भौगोलिक सीमाओं के आसपास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में तैनात अपनी भारी सैन्य मौजूदगी और युद्धपोतों की संख्या में भी बड़ी कटौती करनी होगी।

मेहर न्यूज एजेंसी ने यह महत्वपूर्ण जानकारियां ईरानी वार्ता टीम के बेहद करीबी और विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से सार्वजनिक की हैं। हालांकि, इन ऐतिहासिक शर्तों की अभी तक न तो ईरान सरकार ने और न ही अमेरिकी प्रशासन ने कोई आधिकारिक पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, यह ड्राफ्ट अभी अंतिम चरण में है और इसे ईरान के सर्वोच्च धार्मिक व राजनीतिक नेतृत्व की अंतिम मंजूरी मिलना अभी बाकी है।

ईरानी तेल से प्रतिबंध हटाने और 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण कोष का प्रस्ताव

इस ऐतिहासिक शांति समझौते के आर्थिक पहलुओं पर नजर डालें तो वे ईरान के लिए बेहद फायदेमंद दिखाई दे रहे हैं। मसौदे में ईरान के आर्थिक विकास की मुख्य रीढ़ माने जाने वाले ईरानी तेल (Iranian Oil) के निर्यात पर अमेरिका द्वारा लगाए गए सभी कड़े प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से हटाने या उन्हें लंबे समय के लिए निलंबित करने की बात कही गई है। सबसे दिलचस्प और बड़ी शर्त यह है कि अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी देशों को मिलकर युद्ध की विभीषिका से प्रभावित क्षेत्रों और ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर (लगभग 300 Billion Dollars) की एक विशाल आर्थिक विकास योजना तैयार करनी होगी।

इसके साथ ही, दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों के बीच अगले 60 दिनों तक लगातार उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत का दौर चलेगा, ताकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों को स्थायी रूप से समाप्त करने से जुड़े सभी विवादित मुद्दों पर एक अंतिम और सर्वमान्य समझौता किया जा सके।

परमाणु हथियार न बनाने का संकल्प और फ्रीज फंड को रिलीज करने की मांग

इस शांति समझौते के बदले में ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक बार फिर से अपनी पुरानी प्रतिबद्धता को दोहराया है। ईरान ने स्पष्ट रूप से वादा किया है कि वह भविष्य में कभी भी किसी भी प्रकार का परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) विकसित या निर्मित नहीं करेगा। इस वादे के बदले में अमेरिका आगामी बातचीत के पूरे दौर के दौरान मध्य-पूर्व (मिडिल-ईस्ट) क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत या हथियारों के जखीरे में कोई बढ़ोतरी नहीं करेगा और न ही ईरान पर किसी भी तरह का कोई नया आर्थिक या कूटनीतिक प्रतिबंध लगाएगा।

समझौते के वित्तीय नियमों के तहत, दुनिया भर के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैंकों में सालों से फ्रीज यानी ब्लॉक पड़े ईरान के 24 अरब डॉलर के विशाल फंड को भी तुरंत रिलीज करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, इस पूरी संधि के नियमों के पालन और निगरानी के लिए एक न्यूट्रल विशेष तंत्र (Special Mechanism) बनाया जाएगा, और इस अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के विशेष प्रस्ताव के जरिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंजूरी दिलाई जाएगी। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि अंतिम दौर की मुख्य वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक कि उसका आधा फ्रीज फंड जारी नहीं हो जाता और तेल प्रतिबंध पूरी तरह सस्पेंड नहीं कर दिए जाते।

मिसाइल कार्यक्रम पर रहस्यमयी चुप्पी और लेबनान संकट की जमीनी हकीकत

इस पूरे शांति मसौदे का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इसमें ईरान के बेहद आधुनिक और विवादित मिसाइल कार्यक्रम (Missile Program) तथा क्षेत्र के विभिन्न सशस्त्र संगठनों व प्रॉक्सी समूहों को मिलने वाले उसके सैन्य समर्थन के मुद्दे को पूरी तरह से बातचीत के दायरे से बाहर रखा गया है। दूसरी ओर, जमीनी हकीकत काफी जटिल है क्योंकि इजराइल ने पहले ही कड़े शब्दों में साफ कर दिया है कि वह लेबनान के दक्षिणी हिस्से में हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपना सैन्य अभियान किसी भी कीमत पर नहीं रोकेगा। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले इस संभावित समझौते की अंतिम सफलता काफी हद तक लेबनान और हिज्बुल्लाह की स्थिति पर निर्भर करेगी, जो इजराइली सेना की पूर्ण वापसी की मांग पर अड़े हुए हैं।

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