Middle East Tension: अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्थित मिसाइल ठिकानों पर बड़े पैमाने पर बमबारी की है। यह ठिकाने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज के बेहद नजदीर स्थित है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है। अमेरिका ने इन ठिकानों को निशाना बनाने के लिए 5,000 पाउंड (2,200 किलोग्राम) वजन वाले डीप-पेनेट्रेटर बम का इस्तेमाल किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने ट्वीट में कहा कि ये हमले ईरान की एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों को निष्क्रिय करने का उद्देश्य से किए गए, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में अंतर्राष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बनी हुई थीं।
अमेरिकी हमले का उद्देश्य और असर
बताते चलें कि, सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी बलों ने मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाते हुए जमीन के भीतर जाकर फटने वाले बम गिराए। इन हमलों का उद्देश्य ईरान के उन ठिकानों को नष्ट करना था, जो कि अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों और व्यापार के लिए खतरा पैदा कर रहे थे। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों से ईरान के मिसाइल क्षमताओं पर नियंत्रण पाना संभव होगा और जहाजों की सुरक्षा बढ़ेगी।
ईरान की मिसाइल बौछार और क्षेत्रीय तनाव

इसी बीच, ईरान ने इजराइल की ओर मिसाइलों की बौछार की, जिससे तेल अवीव और आसपास के क्षेत्रों में सायरन बजने लगे। इजराइल की आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, तेल अवीव के रमात गन इलाके में दो लोगों की मौत हुई। साथ ही, सऊदी अरब, कुवैत और अन्य अरब देशों को भी ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा। हालांकि, इन हमलों को हवाई सुरक्षा प्रणालियों ने रोककर निष्क्रिय कर दिया।
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ईरानी अधिकारियों को निशाना बनाया
इजराइल के अनुसार, ये हमले ईरानी शासन को कमजोर करने के उद्देश्य से किए गए। इजराइली सेना ने बताया कि बासिज़ बल के 10 से अधिक ठिकानों पर हमला किया गया और कुछ उच्च रैंकिंग अधिकारियों को मार गिराया गया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इन कार्रवाईयों का उद्देश्य ईरान में शासन को कमजोर करना और जनता को बदलाव का अवसर देना है।
वैश्विक तेल बाजार पर संभावित प्रभाव
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। इसलिए इस जलमार्ग पर किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार में गंभीर अस्थिरता पैदा कर सकती है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनका इरादा इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपनी पकड़ में ढील देने का नहीं है। युद्ध के बढ़ते खतरों के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर चिंता बढ़ गई है।
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