US-Iran Conflict: ट्रंप के आदेश के बाद किन 8 शहरों पर हुए अमेरिकी हमले? बंदर अब्बास भी शामिल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद ईरान के कई शहरों पर सैन्य हमलों की खबरों ने दुनिया का ध्यान खींच लिया है। बंदर अब्बास समेत आठ शहरों के निशाने पर होने की चर्चा है। आखिर किन इलाकों को निशाना बनाया गया, इन हमलों की वजह क्या बताई जा रही है और इसका आगे क्या असर हो सकता है, पूरी रिपोर्ट में जानिए।

US-Iran Conflict

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 9, 2026

US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुका है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए कथित हमलों के जवाब में अमेरिका ने ईरान के भीतर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। अमेरिकी हमलों में दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी ईरान के कई महत्वपूर्ण सामरिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इस सैन्य अभियान के तहत जास्क, सीरिक, बंदर अब्बास, अबू मूसा द्वीप, बुशहर और चाबहार पोर्ट के मैरिटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर जैसे रणनीतिक स्थानों पर भीषण बमबारी की गई। पहली बार उत्तरी ईरान के रेलवे नेटवर्क और रेलवे पुलों को भी हमले का शिकार बनाया गया, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का मुख्यालय तबाह: ट्रंप की चेतावनी का ’20 गुना’ प्रहार

अमेरिकी वायुसेना ने दक्षिण-पूर्वी ईरान के ईरानशहर में स्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ‘सलमान कमांड मुख्यालय’ को नष्ट कर दिया है। तुर्किए में नाटो शिखर सम्मेलन से वाशिंगटन लौटते समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फोर्स वन से मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों का सीधा और कठोर जवाब है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने आगे कोई भी दुस्साहस किया, तो अमेरिका पूर्व के हमलों के मुकाबले 20 गुना अधिक ताकत के साथ जवाबी प्रहार करेगा। राष्ट्रपति का दावा है कि ईरान ने केवल दो नहीं, बल्कि तीन जहाजों को निशाना बनाया था, जिसके बाद यह जवाबी अभियान और अधिक आक्रामक हो गया है।

वार्ता की पेशकश और भरोसे का संकट

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की ओर से बातचीत की इच्छा जाहिर की गई है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर गहरा अविश्वास जताया है। ट्रंप ने सवाल उठाया कि क्या तेहरान किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते का ईमानदारी से पालन करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान समझौते के लिए बेताब है, लेकिन स्थितियां पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो चुकी हैं। ट्रंप के अनुसार, सबसे बड़ी समस्या यह है कि तेहरान की विश्वसनीयता पर भरोसा कैसे किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उनका यह ‘डी-न्यूक्लियराइजेशन’ अभियान ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने पर केंद्रित है।

एयर फोर्स वन और ईरान का खतरा: सुरक्षा पर स्थिति स्पष्ट की

इस दौरान उन अटकलों को भी खारिज किया गया कि तुर्किए से लौटते समय सुरक्षा खतरों के कारण विमान बदला गया था। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि विमान बदलने का निर्णय केवल एयरबेस पर मौजूद लोगों को विमान दिखाने के लिए था। हालांकि, जब उनसे यह पूछा गया कि क्या एयर फोर्स वन को ईरान से कोई खतरा था, तो उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर संकेत दिए। ट्रंप ने कहा कि वे हमेशा से ईरान की हिट-लिस्ट में सबसे ऊपर रहे हैं। इन तमाम घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जहाँ एक तरफ अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है, तो दूसरी ओर परमाणु महत्वाकांक्षा और कूटनीति के बीच एक बड़ा संघर्ष छिड़ा हुआ है।

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