US-Iran Conflict: 13वीं रात भी अमेरिका का हमला, ट्रंप बोले- ईरानी संपत्तियों से होगी जहाजों के नुकसान की भरपाई

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में 13वीं रात भी सैन्य कार्रवाई जारी रही। डोनाल्ड ट्रंप ने जहाजों को हुए नुकसान की भरपाई ईरानी संपत्तियों से करने की बात कही है। आखिर इस फैसले का क्या असर होगा, संघर्ष किस दिशा में जाएगा और वैश्विक बाजारों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? जानिए पूरी खबर।

US-Iran Conflict

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 24, 2026

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US-Iran Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार 13वीं रात ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार यह अभियान गुरुवार (स्थानीय समयानुसार) शाम फिर से शुरू किया गया। सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरों को कम करना और समुद्री मार्गों पर वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक अभियान अभी भी जारी है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

CENTCOM ने हमलों का उद्देश्य बताया

अमेरिकी मध्य कमान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी देते हुए कहा कि शाम करीब 6:45 बजे ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर नए हमले शुरू किए गए। CENTCOM का दावा है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े उन खतरों को कम करना है, जो क्षेत्र में चल रहे वाणिज्यिक जहाजों के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता बनी हुई है।

वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पर भी असर

सेंटकॉम ने बताया कि नौ दिन पहले ईरान के खिलाफ फिर से शुरू की गई नौसैनिक नाकाबंदी के बाद अब तक 12 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला गया है। इसके अलावा एक जहाज को निष्क्रिय भी किया गया, ताकि ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में समुद्री गतिविधियों को सीमित किया जा सके। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य संभावित सुरक्षा खतरों को कम करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखना है।

ट्रंप ने ईरानी संपत्तियों को लेकर दिया बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि यदि वाणिज्यिक जहाजों या उनके माल को किसी प्रकार का नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई अमेरिका के नियंत्रण में मौजूद ईरानी संपत्तियों से की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उनका बयान आधिकारिक सूचना के रूप में देखा जाए। ट्रंप के अनुसार यदि किसी जहाज या कार्गो को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी आर्थिक जिम्मेदारी ईरान पर होगी।

परमाणु हथियारों पर दोहराया सख्त रुख

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। ट्रंप ने कहा कि यह केवल अमेरिका की सुरक्षा का नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता का भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो अमेरिका इस दिशा में आगे भी कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

ईरान पर लगाए गंभीर आरोप

अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेहरान की नीतियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रही हैं और अमेरिका इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। ट्रंप ने कहा कि यदि पहले की सरकारों या अन्य देशों ने इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए होते, तो मौजूदा स्थिति अलग हो सकती थी। हालांकि उन्होंने दोहराया कि अमेरिका अपने सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई जारी रखेगा।

हूती विद्रोहियों को भी दी चेतावनी

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले दोबारा जारी रहे, तो उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की जाएगी। ट्रंप का आरोप है कि हूती समूह ईरान के समर्थन से काम करता है, इसलिए भविष्य में होने वाले ऐसे हमलों की जिम्मेदारी भी ईरान पर तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

सऊदी जहाजों पर हमले का भी किया जिक्र

ट्रंप ने दावा किया कि पिछले वर्ष अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद हूती विद्रोहियों की गतिविधियों में कमी आई थी, लेकिन अब वे फिर सक्रिय होने लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दो वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया। ट्रंप ने कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं जारी रहती हैं, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से कड़ा जवाब दिया जाएगा।

मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव, दुनिया की नजर हालात पर

ईरान, अमेरिका और क्षेत्रीय समूहों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को फिर से चर्चा में ला दिया है। लगातार हो रहे सैन्य हमलों और समुद्री गतिविधियों पर बढ़ती निगरानी के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों और सैन्य गतिविधियों के बीच स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

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