US Iran Conflict : ईरान पर अमेरिका का तीसरी रात भी हमला, ड्रोन-मिसाइल ठिकाने तबाह, ट्रंप की न्यूक्लियर धमकी

ईरान पर अमेरिका के लगातार तीसरी रात किए गए हमलों ने मध्य पूर्व में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। ड्रोन और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने के साथ ट्रंप की न्यूक्लियर धमकी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। आखिर इस संघर्ष का अगला कदम क्या होगा और दुनिया पर इसका कितना असर पड़ेगा? जानिए पूरी रिपोर्ट।

US Iran Conflict

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 14, 2026

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US Iran Conflict : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव अब एक गंभीर सैन्य संघर्ष में तब्दील हो चुका है। अमेरिकी सेना ने लगातार तीसरी रात ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए हैं। पेंटागन के अधीन कार्यरत अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की ड्रोन, मिसाइल और समुद्री निगरानी क्षमताओं को नेस्तनाबूद करना है। अमेरिका का दावा है कि इन सैन्य कार्रवाइयों के जरिए वह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है, जिसे ईरान द्वारा लगातार बाधित किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी और ‘पिकऐक्स माउंटेन’ पर निशाना

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य अभियान के और तेज होने के संकेत दिए हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यह सैन्य कार्रवाई आगामी दो से तीन सप्ताह तक जारी रह सकती है। इस दौरान उन्होंने ईरान के ‘पिकऐक्स माउंटेन’ (कुह-ए-कोलांग गज-ला) को विशेष रूप से निशाने पर लिया है। यह क्षेत्र ईरान का अत्यधिक सुरक्षित सैन्य गढ़ माना जाता है, जहाँ कई गुप्त मिसाइल बेस स्थित हैं। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि उन्हें अमेरिकी सैन्य शक्ति के लिए तैयार रहना चाहिए। स्थानीय ईरानी मीडिया के अनुसार, हमलों के बाद बंदर अब्बास, बुशहर और किश द्वीप सहित कई क्षेत्रों में जोरदार धमाकों की गूंज सुनाई दी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर विवाद और समुद्री नाकाबंदी

इस संघर्ष का सबसे संवेदनशील बिंदु ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बना हुआ है। अमेरिका ने यहाँ नई समुद्री नाकाबंदी लागू करने का ऐलान किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद को ‘गार्जियन ऑफ द स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ घोषित करते हुए कहा कि अब ईरानी जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, अन्य देशों के जहाजों से सुरक्षा के एवज में 20 फीसदी शुल्क वसूलने की घोषणा की गई है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 फीसदी हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।

दोनों देशों के परस्पर विरोधी दावे

अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि ईरान का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कोई अधिकार नहीं है और अमेरिकी हमलों ने उनके एयर डिफेंस, रडार और नौसैनिक ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ईरान का तर्क है कि होर्मुज जलडमरूमध्य उसके संप्रभु अधिकार क्षेत्र में आता है और अमेरिकी हस्तक्षेप पूरी तरह अवैध और उकसावे वाली कार्रवाई है।

संयुक्त राष्ट्र की चिंता और कूटनीतिक समाधान की अपील

ईरान और अमेरिका के बीच इस बढ़ती जंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हिलाकर रख दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। गुटेरेस ने आगाह किया कि यदि इस तनाव को तुरंत नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं। उन्होंने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने का आग्रह करते हुए कहा है कि सैन्य विकल्पों के बजाय कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही इस संकट का समाधान खोजना एकमात्र रास्ता है।

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