US Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 40 दिनों से जारी युद्ध के बाद अब आखिरकार स्थिति ठंडी पड़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित बड़े हमलों से पीछे हटते हुए 2 हफ्ते के लिए सीजफायर का ऐलान कर दिया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को फिर से खोलना और क्षेत्र में तनाव को कम करना बताया गया।
हालांकि इस घोषणा से अंतर्रराष्ट्रीय समुदाय में राहत की भावना पैदा हो गई है। पाकिस्तान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ज मार्शल आसिम मुनीर ने इस संघर्ष विराम में अपना योगदान दिखाने की कोशिश की, लेकिन असली भूमिका चीन की सामने आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी माना कि ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में चीन ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
चीन का सक्रिय मध्यस्थ भूमिका
आपको बता दें कि, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंगे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि चीन ने शुरू से ही मध्य पूर्व शांति स्थापित करने और संघर्ष को रोकने के लिए सक्रिय किए हैं। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के अनुसार, चीन ने ईरान को सीजफायर के लिए राजी करने में मदद की।
माओ निंग ने आगे बताया कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इस प्रक्रिया में संबंधित देशों के विदेश मंत्रियों के साथ फोन पर कुल 26 बार संवाद किया। इसके अलावा, चीन के विशेष दूत ने भी मध्य पूर्व में संबंधित पक्षों के बीच कूटनीति और बातचीत को संचालित किया।
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पाकिस्तान और चीन की संयुक्त पहल

माओ निंग ने कहा कि चीन और पाकिस्तान ने मिलकर खाड़ी और मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिरता स्थापित करने के लिए पांच सूत्रीय संयुक्त पहल का प्रस्ताव रखा। यह पहल क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार की गई। उन्होंने यह भी कहा कि चीन एक जिम्मेदार प्रमुख देश के रूप में इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का काम जारी रखेगा।
ट्रंप का सीजफायर ऐलान और ईरान की प्रतिक्रिया
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष-विराम समझौते के तहत ईरान पर हमलों को दो हफ्ते के लि रोकने का ऐलान किया है। इसका कारण उन्होंने रणनीतक रूप से जरूरी ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को खोलने का प्रयास बताया। हालांकि बीते दिन ट्रंप ने सोशल मीडिया हैंडल ट्रुथ पर ईरान की आबादी को खत्म करने की खुली धमकी दी थी।
सीजफायर पर ईरान का रुख
आपको बता दें कि, फिलहाल के लिए ट्रंप के प्रस्ताव को ईरान ने अस्थायी रूप से मान लेने की संकेत दिया है। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा की अगर अमेरिका हमलों को रोकता है को तेहरान भी अपनी सैन्य कार्रवाई पर रोक लगा देगा। इस कदम से क्षेत्रीय तनाव कम होने और वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने की उम्मीद है।
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