
US Iran War : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सैन्य विमानों की अचानक मध्य पूर्व में बढ़ी तैनाती ने नए सैन्य अभियान की अटकलों को हवा दे दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई का फैसला ले सकते हैं? दरअसल, कम से कम 10 अमेरिकी सैन्य परिवहन विमान इजराइल के प्रमुख एयरबेस पर पहुंचे हैं। इसके अलावा कई दूसरे अरब देशों में भी अमेरिकी विमानों की मौजूदगी बढ़ी है।
इजराइल के एयरबेस पर उतरे 10 अमेरिकी सैन्य विमान
अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में तेजी ऐसे समय देखने को मिल रही है, जब मध्य पूर्व में सुरक्षा को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। इजराइली सार्वजनिक प्रसारक KAN और अनादोलु एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 10 अमेरिकी सैन्य परिवहन विमान इजराइल के दक्षिणी हिस्से में स्थित ओवदा और नेवाटिम एयरबेस पर उतरे हैं।
इन विमानों के अलावा जॉर्डन, सऊदी अरब और कतर के सैन्य ठिकानों पर भी अमेरिकी विमानों की तैनाती की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ विमान अमेरिका के टेक्सास स्थित फोर्ट ब्लिस से रवाना हुए थे। यह अमेरिकी सेना की एयर और मिसाइल डिफेंस यूनिट का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। हालांकि, इन विमानों में किस तरह के हथियार और सैन्य उपकरण लाए गए हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
ट्रंप के फैसले का इंतजार, इजराइल-अमेरिका में बढ़ा तालमेल
अमेरिका की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ईरान के खिलाफ किसी नए हमले को अंतिम मंजूरी दी गई है या नहीं। वहीं, इजराइली अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका और इजराइल लगातार संपर्क में हैं। दोनों देश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संभावित फैसले के अनुसार आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं।सैन्य विमानों की तैनाती को इसी रणनीतिक तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, केवल विमानों की आवाजाही को ईरान पर हमले का अंतिम संकेत नहीं माना जा सकता।

व्हाइट हाउस में ट्रंप को दिए गए ईरान पर हमले के विकल्प
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों की जानकारी दी है।इस अहम बैठक में अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन भी मौजूद थे। बैठक के दौरान ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं और उससे जुड़े रणनीतिक पहलुओं पर चर्चा किए जाने की खबर है।
ईरान के सैन्य और ऊर्जा ठिकाने बन सकते हैं निशाना
रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी सैन्य योजनाओं में ईरान के सैन्य ठिकानों, ऊर्जा बुनियादी ढांचे और महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाने के विकल्प शामिल हो सकते हैं। संभावित कार्रवाई कई दिनों तक चलने वाली हवाई हमलों की श्रृंखला के रूप में हो सकती है।हालांकि, अभी तक ऐसी किसी योजना पर अंतिम मुहर लगने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद अमेरिकी सैन्य हलचल और व्हाइट हाउस में हुई उच्चस्तरीय बैठक ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
पैट्रिअट मिसाइल सिस्टम की तैनाती, जवाबी हमले का डर
अमेरिका केवल हमले के विकल्पों पर ही विचार नहीं कर रहा, बल्कि संभावित जवाबी कार्रवाई से बचाव की तैयारियां भी तेज कर रहा है। खबरों के मुताबिक, टेक्सास से पैट्रिअट मिसाइल डिफेंस सिस्टम को मध्य पूर्व भेजा जा रहा है। इसका उद्देश्य संभावित ईरानी मिसाइल हमलों से अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों की सुरक्षा मजबूत करना है।इसके अलावा, संवेदनशील माने जाने वाले कुछ सैन्य ठिकानों से अमेरिकी कर्मियों को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने की खबरें हैं।
नवंबर में एयरक्राफ्ट कैरियर और मरीन यूनिट की तैनाती संभव
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ताकत और बढ़ने की संभावना है। रिपोर्टों के अनुसार, नवंबर में एक अतिरिक्त एयरक्राफ्ट कैरियर और मरीन कॉर्प्स यूनिट भी इस क्षेत्र में पहुंच सकती है। इससे अमेरिका की समुद्री और सैन्य क्षमता मजबूत होगी।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये सभी तैयारियां केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए हैं या फिर अमेरिका किसी बड़े सैन्य अभियान की भूमिका तैयार कर रहा है। इसका जवाब आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन के फैसलों से ही स्पष्ट हो सकेगा।











