US Intelligence Report: अमेरिकी सीनेट में बुधवार (18 मार्च, 2026) को ‘यूएस इंटेलिजेंस कम्युनिटी’ की वार्षिक रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई गई है। 34 पृष्ठों के इस विस्तृत दस्तावेज में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बने तनावपूर्ण संबंधों के कारण परमाणु संघर्ष का खतरा अभी भी टला नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि दोनों देश प्रत्यक्ष रूप से युद्ध की शुरुआत नहीं करना चाहते, लेकिन आतंकवादी समूहों की सक्रियता किसी भी समय बड़े संकट को जन्म दे सकती है।
परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसियों के बीच संघर्ष की आशंका
खुफिया रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच अतीत में हुए सैन्य टकरावों ने एक ऐसा माहौल बना दिया है, जहाँ तनाव तेजी से बढ़ सकता है। दस्तावेज के मुताबिक, “परमाणु शक्ति संपन्न इन दोनों देशों के बीच टकराव का इतिहास रहा है, जो भविष्य में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की आशंका को जीवित रखता है।” पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के पास हुए आतंकवादी हमले का जिक्र करते हुए रिपोर्ट ने आगाह किया कि ऐसी घटनाएं किसी भी समय बड़े सैन्य संघर्ष को भड़काने के लिए चिंगारी का काम कर सकती हैं।
ट्रंप प्रशासन का हस्तक्षेप और मौजूदा स्थिति का आकलन
रिपोर्ट में वर्तमान अमेरिकी प्रशासन की भूमिका की भी सराहना की गई है। दस्तावेज में कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सक्रिय हस्तक्षेप के कारण हाल के समय में परमाणु तनाव में कुछ कमी आई है। अमेरिकी खुफिया समुदाय का आकलन है कि वर्तमान में न तो भारत और न ही पाकिस्तान खुले युद्ध की स्थिति में लौटना चाहते हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि आतंकवादी तत्वों के लिए अनुकूल परिस्थितियां अभी भी मौजूद हैं, जो किसी भी समय शांति प्रयासों को बाधित कर सकती हैं।
पाकिस्तान और तालिबान के बीच बढ़ता तनाव
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच के बिगड़ते रिश्तों पर भी प्रकाश डाला है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और तालिबान के बीच संबंध काफी तनावपूर्ण रहे हैं और सीमा पार लगातार झड़पें हो रही हैं। इस्लामाबाद इस बात से बेहद निराश है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी आतंकवादी समूह कर रहे हैं। इस कारण पाकिस्तान को अपने ही देश के भीतर बढ़ती आतंकवादी हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र अस्थिर बना हुआ है।
तुलसी गबार्ड की चेतावनी: अमेरिकी सुरक्षा पर मंडराता खतरा
अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने सीनेट खुफिया समिति के समक्ष गवाही देते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने सांसदों को बताया कि पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें अब अमेरिका को भी अपनी जद में लेने में सक्षम हो सकती हैं। गबार्ड ने कहा कि अमेरिका को होने वाले मिसाइल खतरे वर्तमान में 3,000 से बढ़कर 2035 तक 16,000 से अधिक हो सकते हैं। यह आंकड़ा अमेरिकी रक्षा नीति के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करता है।
वैश्विक परमाणु प्रतिद्वंद्विता और भविष्य की चुनौतियां
तुलसी गबार्ड ने रेखांकित किया कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान जैसे देश लगातार अपनी मिसाइल प्रणालियों को आधुनिक बना रहे हैं। ये देश परमाणु और पारंपरिक पेलोड ले जाने में सक्षम उन्नत प्रणालियों पर शोध कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अमेरिका की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता देश को सामरिक खतरों से सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त है, लेकिन इन उभरते खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दक्षिण एशिया में अस्थिरता और इन उन्नत हथियारों का संयोजन भविष्य के लिए एक जटिल सुरक्षा परिदृश्य तैयार कर रहा है।
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