US-India Trade Deal: हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। भारत, जो रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में से एक है, इस बयान से गंभीर चिंता में था। इसके पीछे यह आशंका थी कि अगर टैरिफ लागू हो गया, तो भारत को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता था। हालांकि, अब स्थिति बदल गई है और भारत ने रूस से तेल की खरीद में पर्याप्त कटौती कर दी है, जिससे अमेरिका द्वारा 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का खतरा लगभग खत्म हो गया है।
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत

इस सकारात्मक बदलाव के पीछे भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार बातचीत का बड़ा हाथ है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर लगातार चर्चा हो रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का अमेरिका को निर्यात, भले ही उच्च टैरिफ के तहत हो, लगातार बढ़ रहा है।
अग्रवाल ने बताया कि पिछले साल दिसंबर में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर के बीच डिजिटल माध्यम से एक अहम बैठक भी हुई थी। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं।
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डील पर अटके मुद्दे
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की बातचीत लंबे समय से चल रही थी, लेकिन कुछ मुख्य मुद्दों के कारण डील अटकी हुई थी। इनमें प्रमुख है कृषि और डेयरी सेक्टर। भारत अपने कृषि और डेयरी क्षेत्र को पूरी तरह विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोलने के पक्ष में नहीं है।
वर्तमान में अमेरिका ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया हुआ है। इसमें 25 प्रतिशत बेस टैरिफ शामिल है, जबकि रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया था। इसके अलावा, अमेरिका ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भी 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की योजना बनाई थी, जिससे भारत की चिंता और बढ़ गई थी।
हालिया बयान से बढ़ी उम्मीद
वाणिज्य सचिव के ताजा बयान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत और अमेरिका के बीच जमी बर्फ पिघल रही है। अगर ट्रेड डील पर सहमति बनती है, तो न केवल भारत पर अतिरिक्त टैरिफ का खतरा टलेगा, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंध भी मजबूत होंगे।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञ मानते हैं कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक हालात में भारत और अमेरिका दोनों ही एक-दूसरे को रणनीतिक और आर्थिक साझेदार के रूप में खोना नहीं चाहते। ऐसे में व्यापार समझौते पर मुहर लगना अब केवल समय की बात है। डील से दोनों देशों के व्यापारिक हितों को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक तेल बाजार में भी स्थिरता आएगी।
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