JASSM-ER Missiles : 600 मील दूर से अचूक निशाना, क्या JASSM-ER मिसाइलें बदल देंगी जंग का पासा?

महाविनाश का नया हथियार! अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सबसे शक्तिशाली और रडार की पकड़ से बाहर रहने वाली JASSM-ER मिसाइलों के भंडार को मिडिल ईस्ट की ओर मोड़ दिया है। 1000 किलोमीटर तक मार करने वाली यह मिसाइल बिना पायलट की जान जोखिम में डाले परमाणु ठिकानों को तबाह कर सकती है।

JASSM-ER Missiles

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 5, 2026

JASSM-ER Missiles : मिडिल ईस्ट में शांति और सुलह की तमाम कोशिशें रविवार (5 अप्रैल, 2026) को तब धराशायी होती दिखीं, जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हमले और भी भीषण हो गए। युद्ध अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है जहां अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ अपने सबसे घातक हथियारों का जखीरा खोलने का फैसला किया है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना अपनी सबसे मारक और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों, ‘JASSM-ER’ (Joint Air-to-Surface Standoff Missile – Extended Range) को युद्ध के मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। यह कदम संकेत देता है कि आने वाले दिनों में हवाई हमलों की तीव्रता कई गुना बढ़ने वाली है।

JASSM-ER की मारक क्षमता: रडार की पकड़ से बाहर तबाही

‘JASSM-ER’ क्रूज मिसाइलें अपनी स्टील्थ तकनीक के लिए जानी जाती हैं, जिसका अर्थ है कि दुश्मन का उन्नत रडार सिस्टम भी इन्हें समय रहते पकड़ने में विफल रहता है। इन मिसाइलों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये 600 मील (लगभग 965 किलोमीटर) से अधिक की दूरी से अपने लक्ष्य को सटीक निशाना बना सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अमेरिकी पायलटों को दुश्मन की हवाई सुरक्षा के सीधे खतरे में आए बिना, सुरक्षित दूरी से ईरान के अंदरूनी हिस्सों में तबाही मचाने की सुविधा मिलती है। यह मिसाइल बंकरों और रणनीतिक ठिकानों को धुल चटाने में सक्षम है।

मिसाइलों का भारी इस्तेमाल और आसमान छूती युद्ध की लागत

सूत्रों का दावा है कि जंग शुरू होने के महज चार हफ्तों के भीतर अमेरिका ईरान पर 1,000 से अधिक JASSM-ER मिसाइलें दाग चुका है। अब इनका रुख प्रशांत महासागर स्थित सैन्य ठिकानों से मोड़कर मिडिल ईस्ट की तरफ कर दिया गया है। गौरतलब है कि इस एक मिसाइल यूनिट की कीमत लगभग 15 लाख डॉलर (करीब 12.5 करोड़ रुपये) है। इतनी महंगी मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल यह दर्शाता है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरानी प्रतिरोध को कुचलना चाहता है। हालांकि, भारी उपयोग ने वाशिंगटन के लिए एक नई चिंता पैदा कर दी है।

खाली होते अमेरिकी शस्त्रागार और भविष्य की चुनौतियां

लगातार जारी हमलों के कारण अमेरिका के पास ‘JASSM-ER’ का स्टॉक तेजी से गिर रहा है। युद्ध पूर्व भंडार में 2,300 मिसाइलें थीं, जो अब घटकर केवल 425 रह जाने का अनुमान है। वर्तमान उत्पादन दर को देखते हुए इस भंडार को फिर से भरने में कई साल लग सकते हैं। यह कमी केवल हमलावर मिसाइलों तक सीमित नहीं है; ईरान के बैलिस्टिक मिसाइलों और ‘शाहेद’ ड्रोन्स को रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाली पैट्रियट और थाड (THAAD) इंटरसेप्टर मिसाइलों की भी भारी किल्लत देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चीन जैसे अन्य प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ अमेरिका की युद्धक क्षमता कमजोर हो सकती है।

ईरान का पलटवार: अमेरिकी जेट और ड्रोन्स को बनाया निशाना

भले ही अमेरिका और इजरायल दावा कर रहे हों कि उन्होंने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को पंगु बना दिया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ईरान ने अमेरिकी हवाई ताकत को कड़ी चुनौती दी है। हालिया संघर्ष में ईरान ने अमेरिका के एक आधुनिक F-15E स्ट्राइक फाइटर जेट को मार गिराया। इसके अलावा, एक A-10 अटैक जेट और रेस्क्यू मिशन पर निकले दो हेलीकॉप्टरों को भी निशाना बनाया गया है। ईरान अब तक अमेरिका के 12 से अधिक ‘MQ-9 रीपर’ ड्रोन्स को तबाह करने का दावा कर चुका है, जो यह साबित करता है कि यह युद्ध किसी एक पक्ष के लिए आसान नहीं रहने वाला है।

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