US Iran Tension : ईरानी सरकारी मीडिया प्रेस टीवी की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव एक नए चरम पर पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत, अमीर सईद इरावानी ने ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकेबंदी को लेकर वाशिंगटन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इरावानी ने इस सैन्य कार्रवाई की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हुए इसे ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का प्रत्यक्ष और गंभीर उल्लंघन करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद के वर्तमान अध्यक्ष को लिखे एक औपचारिक पत्र में, ईरानी राजदूत ने अमेरिका के इस कदम को ‘आक्रामकता का अवैध कृत्य’ बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका की यह जिद न केवल क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डाल रही है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा संकट पैदा कर रही है।
यूएन चार्टर की अनदेखी: बल प्रयोग और धमकियों के खिलाफ ईरान की दलील
राजदूत इरावानी ने अपने पत्र में कानूनी आधारों का हवाला देते हुए कहा कि यह नौसैनिक घेराबंदी अंतरराष्ट्रीय नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है। उन्होंने उल्लेख किया कि 12 अप्रैल को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा सार्वजनिक रूप से इस नाकेबंदी की घोषणा की गई थी, जो सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2, पैराग्राफ 4 का उल्लंघन है। इरावानी ने तर्क दिया कि यह चार्टर किसी भी सदस्य राष्ट्र के खिलाफ बल प्रयोग करने या बल प्रयोग की धमकी देने को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका की यह सैन्य गतिविधि अंतरराष्ट्रीय कानून की परिभाषा के तहत ‘आक्रामकता’ (Aggression) का एक स्पष्ट और ज्वलंत उदाहरण है, जिसे किसी भी सभ्य ढांचे में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
वैध समुद्री व्यापार में बाधा: अंतरराष्ट्रीय समुद्र कानून का उल्लंघन
नौसैनिक नाकेबंदी को ‘अवैध’ बताते हुए ईरानी राजदूत ने कहा कि अमेरिका समुद्र के अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रहा है। पत्र के माध्यम से तेहरान ने यह स्पष्ट किया कि ईरानी बंदरगाहों से होने वाले समुद्री यातायात और वाणिज्यिक गतिविधियों को रोकने का कोई भी अमेरिकी प्रयास इस्लामिक गणराज्य के संप्रभु अधिकारों का हनन है। इरावानी ने कहा कि स्वतंत्र और वैध समुद्री व्यापार अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, और अमेरिका का यह हस्तक्षेप समुद्री स्वतंत्रता के सिद्धांतों को कमजोर करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने आर्थिक हितों और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
अमेरिका होगा अंजाम का जिम्मेदार: ईरान ने दी सख्त चेतावनी
अमीर सईद इरावानी ने अपने संबोधन में यह कड़ा संदेश दिया कि ईरान अमेरिका की इस ‘गुंडागर्दी’ को चुपचाप सहन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि तेहरान इस अवैध कार्रवाई को पूरी तरह से खारिज करता है और इसकी तीव्र निंदा करता है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का ‘वैध अधिकार’ रखता है। राजदूत ने स्पष्ट किया कि यदि इस नाकेबंदी के कारण क्षेत्र की शांति भंग होती है या कोई सुरक्षा संकट उत्पन्न होता है, तो इसके सभी परिणामों के लिए पूरी तरह से संयुक्त राज्य अमेरिका ही जिम्मेदार होगा। तेहरान का रुख अब पूरी तरह से रक्षात्मक से आक्रामक होता दिख रहा है।
सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग: आधिकारिक दस्तावेज के रूप में पत्र की प्रस्तुति
अंत में, ईरानी दूत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तत्काल हस्तक्षेप करने का आह्वान किया। उन्होंने परिषद से आग्रह किया कि वह इस नाकेबंदी की औपचारिक निंदा करे और अमेरिका को तनाव बढ़ाने वाले कदमों से रोके। इरावानी के अनुसार, पहले से ही संवेदनशील और अस्थिर मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है। उन्होंने अनुरोध किया कि उनके द्वारा भेजे गए इस विरोध पत्र को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक आधिकारिक दस्तावेज के रूप में पंजीकृत और प्रसारित किया जाए, ताकि विश्व पटल पर अमेरिका की इन ‘अवैध’ गतिविधियों का रिकॉर्ड दर्ज हो सके।









