UP News: UP में किरायेदारी नियम बदले, 10 लाख तक किराए पर बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश में योगी कैबिनेट ने किरायेदारी व्यवस्था को आसान बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। 10 लाख रुपये तक के सालाना किराए पर निर्धारित शुल्क व्यवस्था लागू होगी। दो लाख तक 1,000, छह लाख तक 3,000 और 10 लाख तक 4,500 रुपये वार्षिक शुल्क तय किया गया है। कैबिनेट ने 23 प्रस्तावों को मंजूरी दी।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 16, 2026

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UP News: उत्तर प्रदेश में मकान, दुकान या गोदाम किराये पर लेने और देने वालों के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में किरायेदारी व्यवस्था को सरल और किफायती बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। नए प्रावधान के तहत 10 वर्ष तक की अवधि वाले किरायेदारी या पट्टा विलेखों पर प्रभावी स्टांप शुल्क और पंजीयन फीस की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे किरायानामा तैयार कराने और उसका पंजीकरण कराने में लोगों पर पड़ने वाला अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम होगा।

सर्किल रेट के आधार पर स्टांप शुल्क की गणना से मिलेगी राहत

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बताते चले कि, अब तक प्रदेश में मकान, दुकान या गोदाम किराये पर देने अथवा लेने की स्थिति में स्टांप शुल्क की गणना कई मामलों में संबंधित संपत्ति के सर्किल रेट के आधार पर होती थी। इसके चलते किरायानामा पंजीकृत कराने की लागत बढ़ जाती थी। किरायेदारी व्यवस्था में बदलाव के तहत अब निर्धारित वार्षिक किराए के आधार पर शुल्क तय करने की व्यवस्था की गई है। स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य किरायेदारी से जुड़े दस्तावेजों के पंजीकरण को आसान बनाना और शुल्क प्रणाली को अधिक स्पष्ट करना है।

10 लाख रुपये तक के सालाना किराए पर तय होगा वार्षिक शुल्क

योगी सरकार की नई किरायेदारी शुल्क व्यवस्था में सालाना किराए की अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। इसके तहत दो लाख रुपये तक के वार्षिक किराए पर 1,000 रुपये शुल्क देना होगा। वहीं छह लाख रुपये तक के सालाना किराए पर 3,000 रुपये और 10 लाख रुपये तक के वार्षिक किराए पर 4,500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे किरायेदार और मकान मालिक पहले से अधिक स्पष्ट तरीके से यह समझ सकेंगे कि किरायानामा पंजीकरण के लिए कितना शुल्क देना होगा।

23 प्रस्तावों पर योगी कैबिनेट की मुहर

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मुख्यमंत्री आवास पर हुई योगी कैबिनेट बैठक में किरायेदारी व्यवस्था के अलावा कुल 23 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों में प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने, उत्तर प्रदेश में खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने, चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण और किसानों को आसान दरों पर कर्ज उपलब्ध कराने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने से संबंधित कदम भी कैबिनेट के फैसलों में शामिल रहा।

चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे पर बड़ा फैसला

चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना को भी कैबिनेट से मंजूरी मिली है। प्रस्ताव के मुताबिक एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से करीब 15.172 किलोमीटर लंबा लिंक एक्सप्रेसवे विकसित किया जाएगा। यह छह लेन का हाईस्पीड एक्सप्रेसवे होगा। परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र में आवागमन को बेहतर बनाने और प्रमुख मार्गों से कनेक्टिविटी मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सरकारी प्राथमिक स्कूल बनेंगे स्मार्ट स्कूल

कैबिनेट ने परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत आने वाले सरकारी प्राथमिक स्कूलों में आधुनिक सुविधाओं और तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना है। सरकार का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने के माहौल को बेहतर बनाना है। स्मार्ट स्कूलों के विकास से विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।

किसानों को 6 प्रतिशत ब्याज दर पर 6 लाख रुपये तक का कर्ज

किसानों के लिए आसान दर पर लोन उपलब्ध कराने से जुड़ा फैसला भी कैबिनेट बैठक में लिया गया। प्रस्ताव के तहत किसानों को छह प्रतिशत की ब्याज दर पर अधिकतम छह लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड की मदद ली जाएगी। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से किसानों को उनकी जरूरतों के लिए अपेक्षाकृत आसान शर्तों पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

किरायेदारी से लेकर शिक्षा, एक्सप्रेसवे और किसान कर्ज तक कई फैसले

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कुल मिलाकर मंगलवार की योगी कैबिनेट बैठक में किरायेदारी शुल्क व्यवस्था में बदलाव के साथ शिक्षा, बुनियादी ढांचे, उद्योग और कृषि से जुड़े कई प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया। खास तौर पर 10 लाख रुपये तक के वार्षिक किराए पर निर्धारित शुल्क व्यवस्था को मकान, दुकान और गोदाम किराये पर लेने-देने वालों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। वहीं चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, स्मार्ट स्कूल और किसानों के लिए छह लाख रुपये तक के ऋण से जुड़े फैसले भी बैठक के प्रमुख बिंदुओं में शामिल रहे।

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